रिपोर्टर – शैलेश, लखनऊ :- लखनऊ राजधानी में हुए दर्दनाक कोचिंग अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वाले 15 लोगों के शवों का केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में करीब सात घंटे तक पोस्टमार्टम किया गया। हादसे के बाद अस्पताल और मोर्चरी के बाहर रोते-बिलखते परिजनों का दर्दनाक मंजर देखने को मिला। मोर्चरी के बाहर उस समय माहौल गमगीन हो गया, जब अपने बेटे की लाश देखकर एक पिता बेहोश हो गए। वहीं बहन चीख-चीखकर कहती रही— “मेरा भाई चला गया… पापा उठ जाओ।” परिवार वालों की चीखों से पूरा माहौल भारी हो गया। हादसे में फंसे कई युवाओं ने जान बचाने की उम्मीद में अपने परिवार वालों को आखिरी फोन किया था। परिजनों के मुताबिक कई बच्चों ने रोते हुए बताया कि बिल्डिंग में आग लग गई है और निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा। सुखमणि सिंह के पिता ने बताया कि बेटे का फोन आया था। उसने घबराई आवाज में कहा— “पापा आग लग गई है, हमें बचा लीजिए।” इसके बाद फोन कट गया और परिवार हमेशा के लिए अपने बेटे को खो बैठा। मोहम्मद आममर के परिवार वालों ने बताया कि उन्होंने भी फोन पर कहा था कि सभी लोग फंस गए हैं और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा। सीतापुर निवासी 3D कैरेक्टर आर्टिस्ट आदित्य श्रीवास्तव ने भी हादसे से पहले अपनी बहन को फोन किया था, लेकिन वह कॉल नहीं उठा सकीं। परिवार के मुताबिक आदित्य के साथ कई अन्य लोग भी फंसे हुए थे। मां कल्पना ने रोते हुए कहा कि उनका बेटा हमेशा दूसरों की मदद करता था। हादसे में लखनऊ के नीलेश और कोलकाता की अनामिका की भी मौत हो गई। दोनों साथ काम करते थे और परिवार शादी की बात भी आगे बढ़ा रहे थे। परिवार वालों के अनुसार जल्द ही बंगाल जाने की तैयारी थी, लेकिन उससे पहले ही यह दर्दनाक हादसा हो गया। आईटी टेक्नीशियन अब्दुल रहमान के माता-पिता खराब स्वास्थ्य के कारण मोर्चरी तक नहीं पहुंच सके। परिवार के अनुसार अब्दुल ने कम उम्र में ही घर की जिम्मेदारी संभाल ली थी। पोस्टमार्टम के बाद सभी मृतकों के शव परिजनों को सौंप दिए गए। हादसे के बाद हर तरफ एक ही सवाल है— आखिर इन मासूम जिंदगियों को बचाया क्यों नहीं जा सका।






