“खुटबाव की जनता खामोश क्यों? व्यसनमुक्ति के दावों के बीच खुलेआम शराब बिक्री पर सवाल”! जब सब जानते हैं, तो आवाज कौन उठाएगा?”

रिपोर्टर – नजीर मुलाणी, दहिवडी ( सातारा), महाराष्ट्र :- खुटबाव गांव ने करीब डेढ़ वर्ष पहले व्यसनमुक्त गांव बनाने का प्रस्ताव पारित कर नशामुक्त समाज की दिशा में कदम बढ़ाने का संकल्प लिया था। ग्राम पंचायत, महिला वर्ग, पुलिस पाटिल, सरपंच, ग्रामसेविका तथा हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में गांव को नशामुक्त बनाने का निर्णय लिया गया था। लेकिन वर्तमान में गांव में अवैध शराब बिक्री खुलेआम जारी होने के आरोप सामने आ रहे हैं, जिससे ग्रामस्थों में नाराजगी का माहौल है। इस मुद्दे को लेकर पत्रकार नजीर मुलाणी ने विभिन्न समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों के माध्यम से कई बार गांव में चल रही शराब बिक्री, विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं तथा महिलाओं की शिकायतों को सार्वजनिक किया। हालांकि इन सवालों पर चर्चा करने के बजाय कुछ लोगों द्वारा पत्रकारों से ही सवाल पूछे जाने की बात सामने आ रही है। गांव की महिलाओं ने व्यसनमुक्ति अभियान के लिए सातारा जिला स्तर तक लगातार प्रयास किए होने का दावा किया है। इसके बावजूद उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिम्मेदार प्रतिनिधियों से जवाब मांगने के बजाय पत्रकारों को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है?
इसी बीच खुटबाव-इंजबाव सड़क निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मुरूम और गिट्टी की जगह आसपास की काली मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही संबंधित विभागों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने की चर्चा भी गांव में हो रही है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की मांग की है। गांव के कई नागरिकों का कहना है कि यदि व्यसनमुक्ति का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद शराब बिक्री नहीं रुक रही, महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा और विकास कार्यों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो सरपंच, पुलिस पाटिल और संबंधित प्रशासन को अपनी स्पष्ट भूमिका जनता के सामने रखनी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि गांव का सामाजिक वातावरण, महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए व्यसनमुक्ति अभियान को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसकी प्रभावी अमलबजावनी भी होनी चाहिए। अन्यथा विकास के बजाय अव्यवस्था और निराशा का माहौल बनने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए कई नागरिकों ने कहा कि गांव की समस्याओं को उजागर करना पत्रकार का कर्तव्य है। ऐसे में पत्रकारों पर सवाल उठाने के बजाय गांव की समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

प्रमुख सवाल
* व्यसनमुक्ति का प्रस्ताव होने के बावजूद गांव में शराब बिक्री क्यों जारी है?
* महिलाओं की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
* ग्राम पंचायत और गांव के प्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं?
* सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच होगी या नहीं?
खुटबाव के विकास और सामाजिक सुधार के लिए ग्रामस्थों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को एकजुट होकर आगे आने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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