रिपोर्टर – सुरेंद्र कुमार पंवार, जोधपुर :- प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने ‘ए.एस.डी एज्यूकेशन सोसाइटी’ ने एक बड़ा कदम उठाया है। 5 वर्षों में 50,000 से अधिक लोगों को साइबर जागरूकता के अभियान से जोड़ने के चलते डिजिटल सुरक्षा और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में अग्रणी संस्था ‘एएसडी (ASD) एज्यूकेशन सोसाइटी’ ने अपने सफलतम 5 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक पड़ाव पर संस्था की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अमृता एस दूदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संस्था की उपलब्धियों को साझा किया और भविष्य के ‘सुरक्षित राजस्थान’ के संकल्प की रूपरेखा मीडिया के सामने रखी। सहकारिता विभाग, राजस्थान सरकार के अंतर्गत पंजीकृत इस संस्था ने पिछले पांच वर्षों में बिना किसी व्यावसायिक लाभ के, विशुद्ध सामाजिक सेवा भाव से डिजिटल इंडिया के सपने को धरातल पर उतारने का काम किया है। प्रेस वार्ता में बताया गया कि संस्था का एकमात्र उद्देश्य समाज के हर नागरिक को डिजिटल रूप से इतना साक्षर बनाना है कि कोई भी साइबर अपराधी उन्हें अपने जाल में न फंसा सके। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए संस्था की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अमृता एस. दूदिया ने बताया कि इस अभियान का मूल दर्शन जीवन एवं पेशेवर मोचर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहे नागरिकों को एक सुदृढ़ एवं विश्वसनीय सहायता प्रणाली प्रदान करना है। संस्था ने अपने सामाजिक अभियान ‘काइंडनेस बूमरेंग’ के माध्यम से अब तक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नागरिकों तक पहुंच बनाकर उन्हें सहयोग, मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि, जब नीयत नेक हो तो कारवां अपने आप बनता चला जाता है। इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है एएसडी एज्यूकेशन सोसाइटी के ‘काइंडनेस बूमरैंग’ सामाजिक अभियान ने। इस अनोखे अभियान के तहत लोग बिना कुछ खर्च किए, पूरी तरह निशुल्क रूप से, एक-दूसरे को विभिन्न क्षेत्रों की महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर आगे से आगे मदद बढ़ा रहे हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से जुड़े इस नेटवर्क ने समाज में आपसी सद्भाव और समरसता की एक नई मिसाल पेश की है। इस अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती यह रही है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को, जिसके पास संसाधनों की कमी है, उसे घर बैठे मोबाइल और कंप्यूटर पर ही हर समस्या का समाधान और विशेषज्ञों की राय निशुल्क मिल रही है।
अपनी इस सामाजिक जिम्मेदारी को आगे बढ़ाते हुए सोसाइटी ने अब राजस्थान सरकार के कर्मचारियों को सुरक्षित करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने बताया कि जोधपुर के सामाजिक संगठन सत्यमेव जयते सिटिजन सोसायटी के साथ सबसे पहले जागरूकता अभियान की शुरुआत हुई थी। उस समय तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राजेंद्र सिंह की उपस्थिति में अभियान का शुभारंभ हुआ था। इसके बाद पुलिस कमिश्नरेट एवं साइबर टीम के सहयोग से जागरूकता कार्यक्रम चलाकर हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया गया। वर्ष 2025-26 में एएसडी एजुकेशन सोसाइटी ने इन्फॉर्मेशन शेयरिंग एंड एनालिसिस सेंटर (आईएसएसी), नई दिल्ली द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी साइबर जागरूकता अभियान को सहयोग एवं समर्थन प्रदान करते हुए डिजिटल सुरक्षा के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जोधपुर शहर में साइबर अपराधों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने हेतु साइबर पुलिस कमिश्नरेट, जोधपुर के साथ मिलकर भी विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं एवं संवाद सत्र आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा, साइबर फ्रॉड से बचाव तथा सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार के प्रति जागरूक किया गया। संस्था ने समाज के हर वर्ग तक अपनी पहुँच बनाई है, जिसके तहत भारतीय सेना के जवानों, पुलिस कर्मियों, कमांडो प्रशिक्षण ले रहे जांबाजों, लघु उद्योग भारती, फॉरेस्ट ट्रेनिंग अधिकारियों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, छोटे-बड़े व्यापारियों तथा ‘अमृता हाट’ शिविर की महिला प्रतिभागियों को डिजिटल लेन-देन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों का प्रशिक्षण दिया गया है। संस्था के इस अभियान की विशेषता यह रही है कि विभिन्न क्षेत्रों के तकनीकी विशेषज्ञों ने बिना किसी आर्थिक स्वार्थ के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक मोबाइल एवं कंप्यूटर के सुरक्षित उपयोग का निःशुल्क मार्गदर्शन पहुँचाया है। संस्थापक अध्यक्ष ने एक बड़े कदम की घोषणा करते हुए बताया कि वर्तमान में तकनीकी अज्ञानता या छोटे प्रलोभनों जैसे कि लॉटरी, फर्जी लिंक और लोन ऐप्स के कारण कई सरकारी कर्मचारी जाने-अनजाने में साइबर अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं और अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। इसी संदर्भ में एएसडी एज्यूकेशन सोसाइटी ने राजस्थान के सभी जिलों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को साइबर अपराधों के प्रति सचेत करने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है। संस्था राज्य के सभी सरकारी विभागों में यह साइबर जागरूकता कार्यक्रम पूर्णतः निशुल्क आयोजित करने की इच्छुक है और इसके लिए राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को एक आधिकारिक पत्र भेजकर सहयोग और अनुमति की अपील की गई है। मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र की जानकारी देते हुए अमृता एस. दूदिया ने बताया कि संस्था ने सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता की मांग नहीं की है। पत्र के माध्यम से केवल यह प्रार्थना की गई है कि राज्य के सभी जिला कलेक्टरों एवं विभागीय अध्यक्षों को इसके लिए निर्देशित करने की कृपा करें, ताकि संस्था बिना किसी सरकारी वित्तीय भार के कर्मचारियों के लिए इन शिविरों का सफलतापूर्वक आयोजन कर सके।






