खुटबाव ग्रामसभा में पानी के मुद्दे पर जोरदार चर्चा; ₹1.56 करोड़ के जल जीवन मिशन फंड के स्थायी उपयोग को लेकर ग्रामीणों का सवाल* – जमीर शेख

रिपोर्टर -नजीर मुलाणी,माण (सातारा),महाराष्ट्र:-माण,खुटबाव:-खुटबाव ग्रामपंचायत में आयोजित ग्रामसभा में गांव के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। इन में सबसे महत्वपूर्ण विषय जल जीवन मिशन के तहत मंजूर लगभग ₹1 करोड़ 56 लाख की निधि से गांव में स्थायी रूप से पानी उपलब्ध कराने का रहा। ग्रामीणों ने स्पष्ट भूमिका रखते हुए कहा कि योजना का लाभ तभी प्रभावी होगा, जब पानी के स्थायी स्रोत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।ग्रामीणों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत गांव के लिए बड़ी राशि मंजूर हुई है और वर्तमान में विभिन्न वाड़ियों एवं बस्तियों तक पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू है। लेकिन पाइपलाइन और पानी की टंकियां तैयार होने के बाद यदि वास्तविक रूप से पानी उपलब्ध नहीं हुआ, तो योजना का उद्देश्य कैसे पूरा होगा? यह सवाल ग्रामसभा में उठाया गया।मारुती मंदिर के पीछे बनी हुई टाकी को तोडवा कर नई टाकी तयार कर के उस मे पाणी उपलब्ध करकर गाव को सप्लाय करे, बताया गया कि यह योजना पूर्व सरपंच सौ.सीमा स्वप्निल सावंत के कार्यकाल में मंजूर हुई थी। उस समय प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भूजल सर्वेक्षण किया गया था। इसमें चोपडे बस्ती के वीर, शेंबडे बस्ती के बोर, चौगुले बस्ती के बोर तथा जाधव बस्ती के बोर का समावेश किए जाने की जानकारी ग्रामीणों ने दी।,इसके बाद सरपंच सुखदेव डुबल के कार्यकाल में योजना की पुनर्रचना (रिवाइज योजना) की गई। हालांकि, पुनर्रचना करते समय नया भूजल सर्वेक्षण किया गया था या नहीं, पानी की उपलब्धता एवं स्रोतों की क्षमता की जांच किस प्रकार की गई तथा पुराने सर्वेक्षण और वर्तमान परिस्थितियों का समन्वय किया गया था या नहीं, इस संबंध में ग्रामीणों ने सवाल उठाए।,ग्रामीणों के अनुसार, वर्तमान में चोपडेवाड़ी स्थित कुएं में पानी उपलब्ध नहीं है, जबकि शेंबडे बस्ती के बोर में भी पानी की मात्रा अत्यंत कम है। ऐसे में ₹1 करोड़ 56 लाख की निधि केवल पाइपलाइन और टंकियों तक सीमित न रहकर गांव के लिए दीर्घकालीन एवं स्थायी जलापूर्ति व्यवस्था तैयार करने में खर्च की जाए, ऐसी मांग ग्रामसभा में की गई।,ग्रामपंचायत एवं संबंधित प्रशासन द्वारा ग्रामीणों के सामने भूजल सर्वेक्षण, उपलब्ध जलस्रोत, उनकी क्षमता, योजना में किए गए बदलाव, मंजूर निधि तथा अब तक हुए कार्यों की पारदर्शी जानकारी रखी जाए, ऐसी अपेक्षा भी व्यक्त की गई।,जर्जर एवं खंडहर मकानों का मुद्दा भी उठा,ग्रामसभा में गांव के जर्जर एवं खतरनाक मकानों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संबंधित मकान मालिकों को नोटिस दिए जाने तथा जर्जर मकानों को स्वयं हटाने के निर्देश दिए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि, मकान गिराने के बाद उस जमीन पर कोई अन्य व्यक्ति कब्जा कर सकता है, ऐसी आशंका मकान मालिकों द्वारा व्यक्त की गई।,इस समस्या का ग्रामपंचायत, सरपंच एवं ग्रामसेवक द्वारा स्थायी समाधान निकाला जाए, ऐसी मांग की गई। जर्जर मकानों के कारण सांप, चूहे एवं अन्य जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ सकता है और नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए जिन परिवारों को घरकुल मंजूर हुए हैं, उन्होंने आवश्यक प्रयास कर अपने आवास निर्माण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ानी चाहिए, ऐसा मत व्यक्त किया गया।,वाड़ी-बस्तियों के रास्ते एवं बिजली व्यवस्था पर ध्यान देने की मांग,गांव से विभिन्न वाड़ी-बस्तियों तथा खेतों तक जाने वाले रास्तों की हालत सुधारने की आवश्यकता भी ग्रामीणों ने रखी। बरसात तथा खेती के मौसम में इन रास्तों के कारण किसानों एवं नागरिकों को परेशानी होती है। इसलिए रास्तों की मरम्मत एवं सुधार कार्यों को प्राथमिकता देने की मांग की गई।,इसके साथ ही कुछ वाड़ी-बस्तियों में बिजली आपूर्ति के लिए लोहे के खंभे तथा खुले तार होने का मुद्दा भी उठाया गया। कुछ स्थानों पर तारों के जोड़ जमीन से कम ऊंचाई पर होने के कारण किसानों एवं नागरिकों की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए बिजली व्यवस्था का निरीक्षण कर खतरनाक तारों एवं जोड़ को तत्काल सुरक्षित करने की मांग की गई।,वाघजाई देवी परिसर के विकास का मुद्दा,ग्रामसभा में वाघजाई देवी परिसर के विकास का विषय भी चर्चा में आया। ग्रामपंचायत की जमीन का उचित उपयोग करते हुए श्रद्धालुओं के साथ-साथ गांव को भी इसका लाभ मिले, इस दृष्टि से परिसर का विकास करने को प्राथमिकता देने की मांग की गई।,राजनीति से ऊपर उठकर गांव के विकास के लिए एकजुटता की अपेक्षा,ग्रामीणों ने जोर देकर कहा कि शासन से गांव के लिए मिलने वाली निधि का उचित एवं पारदर्शी तरीके से उपयोग होना चाहिए। विकास कार्यों में राजनीतिक मतभेद न लाते हुए सभी को एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है।,ग्रामसभा केवल विरोध करने का मंच नहीं, बल्कि गांव के विकास की दिशा तय करने वाला लोकतांत्रिक मंच है। इसलिए पानी, स्वच्छता, शौचालय, सड़क, बिजली, घरकुल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्रामीणों, ग्रामपंचायत पदाधिकारियों तथा प्रशासन को मिलकर काम करना चाहिए, ऐसी भावना ग्रामस्थों ने व्यक्त की।,विशेष रूप से जल जीवन मिशन के तहत मंजूर की गई इतनी बड़ी निधि किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं जानी चाहिए। इस निधि से गांव की प्रत्येक वाड़ी एवं बस्ती तक वास्तविक रूप से पानी पहुंचे, इसके लिए सरपंच एवं ग्रामसेवक को संबंधित विभाग के साथ लगातार समन्वय एवं आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए, ऐसी मांग ग्रामीणों ने की।,यह सवाल किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं, बल्कि खुटबाव के भविष्य के जलप्रश्न से जुड़ा है। गांव को स्थायी रूप से पानी मिले, शासन की निधि का उचित तरीके से उपयोग हो और सभी नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं मिलें, यही ग्रामीणों का मुख्य उद्देश्य है,” ऐसी भूमिका ग्रामस्थों की ओर से व्यक्त की गई।,ग्रामसभा में उठाए गए सभी मुद्दों पर शासन स्तर पर उचित कार्यवाही कर आवश्यक निधि एवं प्रशासनिक मंजूरी उपलब्ध कराने के लिए ग्रामपंचायत पदाधिकारियों ने प्रयास करने चाहिए, ऐसी अपेक्षा व्यक्त की गई।
गांव की महिलाओं, विद्यार्थियों, किसानों एवं आम नागरिकों के हित को ध्यान में रखते हुए “व्यक्ति का विरोध नहीं, विकास ही केंद्रबिंदु” रखकर काम करने का आह्वान ग्रामस्थों की ओर से किया गया।

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