गौ सम्मान आह्वान – एक सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय दायित्व

रिपोर्टर – कैलाश पारीक, बीकानेर, राजस्थान :- सनातन संस्कृति में गौमाता को केवल एक पशु नहीं, बल्कि मातृस्वरूपा, करुणा, समृद्धि, कृषि, पर्यावरण और धर्म की आधारशिला माना गया है। हमारे वेद, पुराण, रामायण, महाभारत तथा श्रीकृष्ण की लीलाएँ गौसेवा और गौसंरक्षण के महत्व से परिपूर्ण हैं। भारतीय जीवन पद्धति में गाय का स्थान सदैव पूजनीय रहा है, क्योंकि वह समाज के आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक जीवन का अभिन्न आधार रही है। आज आवश्यकता है कि हम अपनी इस गौरवशाली परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु एकजुट होकर अपनी आस्था और संकल्प का परिचय दें। “गौ सम्मान आह्वान अभियान” इसी उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, जिससे समाज की सामूहिक भावना को सशक्त स्वर मिले तथा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से शासन-प्रशासन तक जनभावनाएँ पहुँचाई जा सकें। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित संकीर्तन पदयात्रा एवं हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र के माध्यम से गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने तथा भारत में गौसंरक्षण के प्रति व्यापक जन-जागरण का संदेश दिया जाएगा। यह अभियान किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि प्रत्येक सनातनी के कर्तव्य, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का अभियान है और अब से हमें यह कहना और मानना है कि गाय हमारी नहीं मेरी माता है। अतः आप सभी धर्मप्रेमी बंधुओं, मातृशक्ति, युवा साथियों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, भजन मंडलियों तथा व्यापारी समाज से विनम्र अनुरोध है कि दिनांक 27 जुलाई 2026 (सोमवार) को सुबह 09:15 बजे करनी सिंह स्टेडीयम मेंअधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक जन-आंदोलन का हिस्सा बनें। *सुबह 9:15बजे से 10:15 तक विजय मंत्र ” श्री राम जय राम जय जय राम ” का जाप किया जाएगा।इसके पश्चात् सुबह 10:15 बजे एक संकीर्तन पदयात्रा के रूप में करनी सिंह स्टेडियम बीकानेर से (जीला मुख्यालय) में देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति महोदया, राज्य के मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल महोदय के नाम हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना पत्र(ज्ञापन) कलेक्ट्र महोदय जी को सोंपा जाएगा। आइए, हम सब मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत के सम्मान, गौसंरक्षण के संकल्प और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक स्वर में आगे बढ़ें। आपकी सहभागिता ही इस अभियान की सबसे बड़ी शक्ति और सफलता होगी। “जहाँ गौ का सम्मान होता है, वहाँ धर्म, समृद्धि और सद्भाव का वास होता है।” आइए, गौमाता के सम्मान में एकजुट होकर इस ऐतिहासिक पावन अभियान के सहभागी बनें।

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