रिपोर्टर – सुरेंद्र कुमार पंवार, कोलकाता :- पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। चुनाव आयोग के हालिया फैसले और नाटकीय घटनाक्रमों के बाद विपक्ष की स्थिति गंभीर हो गई है।
घटनाक्रम के मुख्य बिंदु:
TMC नाम और सिंबल फ्रीज चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (AITC) के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को आगामी उपचुनाव के लिए फ्रीज कर दिया है। शुक्रवार को आयोग ने दोनों गुटों को नए नाम और सिंबल आवंटित किए। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले छोटे गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है। शुभेंदु से मुलाकात के बाद पर्चा वापस ममता गुट की महिला उम्मीदवार ने भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नामांकन वापस ले लिया। कांग्रेस को समर्थन और गिरफ्तारी उम्मीदवार के हटने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। हालांकि, समर्थन के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने पुराने मामले के तहत कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया। अधीर रंजन चौधरी (कांग्रेस) कांग्रेस नेता ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि नामांकन के समय कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन समर्थन मिलते ही प्रत्याशी को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक नियमों को कुचलने वाला कदम बताया।
राहुल गांधी (कांग्रेस नेता) “भाजपा चुनाव लड़ने के बजाय चुनावी मुकाबला खत्म करना चाहती है। कांग्रेस न डरेगी, न झुकेगी; बल्कि चुनाव लड़ेगी और जीतेगी।” किरेन रिजिजू (केंद्रीय मंत्री, भाजपा) पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस खुद ‘भस्मासुर’ है, जो अपने संपर्क में आने वाली हर पार्टी को भस्म कर देती है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि वे दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपना दामन देखें। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि आयोग ने पार्टी के बहुसंख्यक कैडर और बुनियादी संगठनात्मक ढांचे को नजरअंदाज कर बागी गुट के दावों को अनुचित प्राथमिकता दी है।




