रिपोर्टर -नजीर मुलाणी/ सिटी -वसई( पालघर)/ राज्य- महाराष्ट्र :-अल नीनो के प्रभाव से मानसून में देरी की आशंका; 1972 से भी गंभीर सूखे की स्थिति बनने का अनुमान, पानी का दुरुपयोग करने वालों पर होगी कार्रवाई — महापौर आजीव पाटील सई | प्रतिनिधि ऑल इंडिया: नजीर मुलाणी वसई-विरार : अल नीनो के संभावित प्रभाव के कारण आगामी मानसून में देरी होने की आशंका जताई जा रही है। यदि जून-जुलाई महीने में अपेक्षित बारिश नहीं हुई, तो वर्ष 1972 के सूखे से भी अधिक गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इस संभावित संकट को ध्यान में रखते हुए नागरिक अभी से पानी की बचत करें, ऐसी अपील वसई-विरार शहर महानगरपालिका के महापौर आजीव पाटील ने की है। महापौर ने कहा कि वर्तमान में शहर में पर्याप्त पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन भविष्य की परिस्थितियों को देखते हुए पानी का इस्तेमाल सावधानी और किफायत से करना बेहद जरूरी है। तेज गर्मी के कारण पानी का बड़े पैमाने पर वाष्पीकरण हो रहा है, जिससे उपलब्ध जल भंडार कम होने का खतरा है। इसलिए पानी की प्रत्येक बूंद कीमती है और उसका सोच-समझकर उपयोग किया जाना चाहिए। दैनिक जीवन में कई बार अनजाने में पानी की बर्बादी होती है। दाढ़ी बनाते समय या सुबह के अन्य कामों के दौरान नल खुला छोड़ना, गाड़ियां धोने के लिए जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना तथा पेड़-पौधों को आवश्यकता से अधिक पानी देना जैस आदतों से बचना चाहिए। घर में इस्तेमाल किए गए पानी का जहां संभव हो, वहां दोबारा उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा नागरिक अपने परिसर की बोरवेल और कुओं की साफ-सफाई एवं देखभाल करें। शहर के पुराने कुओं और छोटे तालाबों की सफाई के लिए नागरिक महानगरपालिका से मांग करें। ऐसे कार्यों के लिए महानगरपालिका आवश्यक सहयोग देने को तैयार है। हालांकि पानी बचाने की जिम्मेदारी नागरिकों को भी स्वीकार करनी होगी। शहर में आज भी कुछ नागरिक गाड़ियां धोने, पेड़-पौधों को पानी देने तथा अन्य कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद करते दिखाई दे रहे हैं। इस संबंध में महापौर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वसई-विरार में पानी की आपूर्ति पर किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। लेकिन भविष्य में पानी की स्थिति गंभीर होने पर महानगरपालिका को कुछ कठोर निर्णय लेने पड़ सकते हैं। पानी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ महानगरपालिका कार्रवाई करेगी। यदि नागरिकों को कहीं पानी की बर्बादी होती दिखाई देती है, तो वे इसकी जानकारी महानगरपालिका को दें। प्राप्त शिकायतों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी, ऐसा भी महापौर ने स्पष्ट किया। पानी बचाने की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर से करनी चाहिए। सुबह नई पानी की आपूर्ति शुरू होने पर पहले से उपलब्ध पानी को फेंक देना, नल से पानी रिसने के बावजूद उसकी मरम्मत नहीं करवाना, फ्लश में जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना तथा मेहमानों को पीने के लिए पूरा गिलास भरकर देना और बचा हुआ पानी फेंक देना जैसी आदतों में बदलाव लाना आवश्यक है। नागरिकों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पानी की बचत को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्वयं जागरूक रहने के साथ-साथ दूसरों को भी पानी बचाने का महत्व समझाना चाहिए। सोशल मीडिया के माध्यम से पानी बचाने के संदेश प्रसारित कर जनजागृति की जानी चाहिए। यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर से पानी बचाने की पहल करता है, तो भविष्य में उत्पन्न होने वाले संभावित जल संकट का सामना करना आसान होगा। महानगरपालिका आवश्यक सहयोग देने के लिए तैयार है, लेकिन नागरिकों को भी पानी की बर्बादी रोककर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए, ऐसी अपेक्षा महापौर आजीव पाटील ने व्यक्त की।
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