पत्रकार – रणजीत सिंह राजपुरोहित, पाली, राजस्थान :- लोकतंत्र निर्माण पंडाल विधायक, सांसद की रेश में भी पछाड़ किनारे ही किया जाता रहा । भारत की आजादी से अब तक सांसद बनने तक की रेस अवसर नहीं या वंचित ही रहा, रखा गया । लोकतंत्र निर्माण अवसर भी जातिवाद ऊर्जा समीकरण में पैर पसार रहा या आरक्षण रथ में रूक जाता है । सतयुग से कलयुग तक न्याय प्रक्रिया कि भुमिका में रहा राजा की नियुक्ति और निष्कासन का अधिकारी भी रहा । युद्ध कलां प्रशिक्षण से लेकर खुद सशस्त्र भुमिका में सेनापति का अभिनव भी निभाता रहा ,राजा प्रजा और अपनी भुमी की हिफाजत में प्राणों की आहुतियां देकर भी हिफाजत में रहा सपथ कर्तव्यों में । भारत कि आजादी हेतु भी अंग्रेजों से लोहा लिया प्राणों की आहुतियां भी दी । देश की आजादी के बाद सभी शक्तियां स्वाह किनारे करने के शिवाय कुछ नहीं बचा । भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा के साथ जुड़े रहे । आज के युग में सबसे अत्यधिक मतदान करके भी समाज असहाय, अबला ही साबित होता है जब भी शोषण , दुराचार, हत्या, रेप मर्डर, किडनैपीय , नारी शोषण , सामुहिक षड़यंत्र, समुहों द्वारा हमला , हत्या हो जाये तो न्याय हेतु हाथ जोड़कर भिख मांगे , धरना प्रदर्शन कर मांग करें तो छुट भय्या नेता और कोर वोटर , जनप्रतिनिधि , विधायक, सांसद, लोक सभा सांसद, राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष या भाजपा मुख्यमंत्री तक मददगार साबित नहीं होते तो वहीं प्रतिबिम्ब में कार्य पालिका के लोक सेवक भी जातिगत समीकरण में समस्या का तल जोड़ करने में लगते । क्यु की शांति प्रिय समाज है कानून को नहीं तोड़ता,किसी की सम्पत्ति जन धन को क्षति नहीं पहुचाना चाहता, सरकारी सम्पत्ति को भी क्षत्रि नहीं पहुंचाना चाहता तो न्याय से वंचित ही रह जाते । रोड़ जाम करने वाले, ट्रेन रोकने वाले पटरिया उखाड़ने वाले, उत्पात करने वाले सरकार को ललकार ने वाले लोग अपना मिशन पुर्ण कर लेते , विधायक पालिका और कार्यपालिका झुक जाती है । अर्थात न्याय छिन्न कर लेने की मानो प्रथा ही बन गयी । जन प्रतिनिधि भी न्याय सहायता राशि और मदद में सोतेला व्यवहार करते ही अक्सर साबित हुए । 2016 मनोहर राजपुरोहित नेतरा के न्याय हेतु मुख्य मंत्री से प्रधानमंत्री गृहमंत्री तक का सफर पर न्याय नहीं मिला । एक लाख पोस्ट कार्ड अभियान संघर्ष में केन्द्रीय गृह मंत्रालय अमित शाह को पत्र लिखकर भेजे पर सी बी आई जांच नहीं हुई । समाज के व्यक्तियो पर ज़ुल्म के संगीन मामले करीब दो दर्जन से ज्यादा होंगे और लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देश भारत में राजपुरोहित समाज के नागरिकों की कोई सुंध लेने वाले कहीं नहीं भारत में न्याय प्रक्रिया में धुमिल ही रहे जिसमें अत्यधिक समाज बंधुओं, महिलाओं के हत्या के मामले । मतदाता मतदान करके भी ठगा हुआ । सरकारें कर लेकर भी जन धन की सुरक्षा नहीं कर सकती ,फ्रि में न्याय भी नहीं मिलता । राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल जी ,व राजस्थान गृह मंत्रालय, प्रांत मंत्रीयो ,सांसदों , विधायकों ,प्रधानो, जिला प्रमुखों एवं राजस्थान भाजपा अध्यक्ष श्री मदन राठौड़ समाधान के आयाम स्थापित करें वर्ना भाजपा राजनीति का पुल हिलेगा अगले चुनावों में । बड़े दुःखी मन से जब समाज की स्थिति कई दशकों के मूल्यांकन में देखने के बाद मजबूर कर दिया ।
राजस्थान स्वायत्त शासन सचिव व मुख्यमंत्री जन भावनाओं का सम्मान करते हुए लोकतंत्र की जनता मालिक एक राजपुरोहित समाज की ध्वनि सुनो !
शासन तंत्र से अब हार चुके भिक्षा में एक समाज को न्याय दिलावे !






