सच लिखने की सज़ा? पत्रकारों को धमकी, दबाव और झूठे मामलों में फँसाने की साज़िश!

रिपोर्टर – नजीर मुलाणी, वसई (पालघर), महाराष्ट्र :- लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों पर बढ़ते दबाव, धमकियों और झूठे आरोपों की घटनाओं ने पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ठाणे मध्यवर्ती सहकारी बैंक चुनाव के दौरान पत्रकार दिपक कोटेकर के साथ कथित एपीआय पोलीस अधिकारी ने धक्कामुक्की की घटना के बाद अब वसई गाव क्षेत्र में भी निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ कथित दलाल और स्वार्थी तत्व एक पत्रकार को टारगेट कर उसके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। “झूठ बोलो, नहीं तो फिर जेल जाना पड़ेगा”, “तुम पर दोबारा केस दर्ज होगा” जैसी धमकियां दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ लोग कानून का दुरुपयोग कर पत्रकारों को मानसिक रूप से दबाव में लाने का प्रयास कर रहे हैं। पत्रकारों का कहना है कि सच को जनता तक पहुँचाना उनका कर्तव्य है और किसी भी दबाव या धमकी के आगे झुकना पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। लेकिन कुछ स्वार्थी लोग अपने कथित काले कारनामों को छिपाने के लिए पत्रकारों पर दबाव बनाने का काम कर रहे हैं। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ लोग पुलिस प्रशासन का नाम लेकर या प्रभाव दिखाकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे पत्रकारों में भय का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। पत्रकार संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पत्रकारों पर हमला, धमकी और दबाव सिर्फ किसी एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है। “पत्रकारों की आवाज़ दबाना बंद करो, लोकतंत्र बचाओ” के नारे के साथ पत्रकार संगठन जल्द ही आगे की रणनीति तय कर सकते हैं। और और खासदार संजय दिना पाटील इनो ने भी पत्रकार पर गाली गलोज और दोबारा आयेंगे तो मारेंगे इस तरह पत्रकार को धमकानी का काम किया ये महाराष्ट्र मे क्या चल रहा है कानून है या नही इस वजह से आज महाराष्ट्र के अंदर दिन दहाड़े मर्डर हो रहे हैं बलात्कार हो रहे हैं गृह मंत्री उपमुख्यमंत्री इस पर कानून कड़क नियमों का पालन करेंगे या नहीं इस तरह से चलते रहेगा इस वजह से खाकी वर्दी वाले सांसद वाले गुंडे शाही करते रहेंगे क्या सामान्य लोगों को किस तरह से न्याय देंगे और लोकतंत्र लोकशाही संविधान का क्या होगा इसका जिम्मेदार कौन जनता की आवाज गुंज रही है!

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