रिपोर्टर – नजीर मुलाणी, दहिवडी, महाराष्ट्र, माण ,खुटबाव -माण तालुका के खुटबाव गांव में शराबबंदी का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद आज भी गांव में खुलेआम शराब बिक्री जारी होने से ग्रामीणों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है। खासकर महिलाओं में जबरदस्त आक्रोश है। गौरतलब है कि 3 अगस्त 2024 को गांव में महिलाओं की बड़ी बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 87 पुरुष और 80 महिलाएं उपस्थित रहीं। इस बैठक में गांव के पुलिस पाटील, सरपंच, उपसरपंच और ग्रामसेविका भी मौजूद थे। उसी समय “जुल्म से जंग” के ऑल इंडिया रिपोर्टर नजीर मुलाणी ने इस गंभीर मुद्दे को मीडिया के माध्यम से प्रमुखता से उठाया था। पुलिस थाने व जिला प्रशासन को पत्राचार बैठक के बाद ग्रामीणों ने मान तालुका पुलिस स्टेशन और सातारा जिला प्रशासन को पत्र देकर गांव को पूरी तरह नशामुक्त करने की मांग की थी। साथ ही गांव में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया था। एक साल बाद भी शराबबंदी लागू नहीं—जनता का सवाल
लेकिन प्रस्ताव पारित हुए एक वर्ष बीत जाने के बावजूद भी गांव में शराबबंदी का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर मुद्दे पर गांव के मुख्य प्रतिनिधि पुलिस पाटील धनाजी चोपडे और सरपंच सुखदेव डुबल “गायब” जैसे नजर आ रहे हैं। आदेश और केस के बावजूद ‘बिंदास’ बिक्री ग्रामीणों का कहना है कि शिंगणापुर और दहिवडी पुलिस थाने से आदेश जारी होने तथा कुछ मामलों में केस दर्ज होने के बावजूद भी खुटबाव में शराब बिक्री धड़ल्ले से जारी है। स्कूल के पीछे बोतलें—बच्चों पर असर गंभीर बात यह है कि गांव के स्कूल के पीछे शराब की खाली बोतलें और नशे से जुड़ा सामान मिलने की घटनाएं सामने आई हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इसका असर कक्षा 1 से 7 तक के बच्चों पर पड़ सकता है, जो बेहद चिंताजनक है। महिलाओं की मांग: “प्रतिनिधियों की खोज अभियान चलाओ!” गांव की महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि पुलिस पाटील और सरपंच की ‘खोज अभियान’ चलाकर उन्हें जिम्मेदारी निभाने के लिए बाध्य किया जाए। महिलाओं का कहना है कि यदि इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठेंगे। मंत्री जयकुमार गोरे से मांग—खुटबाव गांव गोद लें इसी के साथ ग्रामीणों ने मान तालुका के विधायक एवं महाराष्ट्र के ग्राम विकास मंत्री तथा सोलापुर के पालकमंत्री जयकुमार गोरे से मांग की है कि वे खुटबाव गांव को गोद लेकर विकास कार्यों को गति दें। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के प्रतिनिधि “पुलिस पाटील बोलो… सरपंच बोलो…” कहावत तक बन चुके हैं, लेकिन जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। नशाखोरी बढ़ने के पीछे कारण ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पानी की कमी, किसानों को फसल का सही दाम न मिलना, आर्थिक तनाव,
इन कारणों से नशाखोरी बढ़ रही है, जिसका सीधा असर महिलाओं और परिवारों पर पड़ रहा है। महिलाओं का तंज: “लाडली बहनों को पैसा मिला—अब लाडली महिलाओं के पति को नशामुक्त करना भी जरूरी!” महिलाओं ने कहा कि सरकार ने लाडली बहन योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता दी है, लेकिन अब गांव को नशामुक्त करने के लिए पुरुषों को शराब से दूर रखने हेतु सख्त कार्रवाई भी जरूरी है।







