भाजपा के 23 नगरसेवक होंगे अयोग्य? वसई-विरार महापौर चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक-कानूनी घमासान

रिपोर्टर – नजीर मुलाणी, वसई, महाराष्ट्र :- वसई-विरार महानगरपालिका में महापौर एवं उपमहापौर चुनाव से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के 23 निर्वाचित नगरसेवकों की सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा है। आरोप है कि इन नगरसेवकों ने चुनाव के दौरान जो नामांकन पत्र दाखिल किए थे, उनमें गंभीर कानूनी खामियां मौजूद हैं। शपथपत्र पर हस्ताक्षर नहीं, नामांकन अवैध! आरोपों के अनुसार, उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र के Verification (पड़ताल) कॉलम पर प्रत्याशी के हस्ताक्षर ही नहीं हैं। कानून के मुताबिक यदि शपथपत्र पर प्रत्याशी (Deponent) के हस्ताक्षर नहीं हों, तो वह शपथपत्र कानूनी रूप से अमान्य माना जाता है। ऐसे में इन सभी नामांकन पत्रों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव निर्णय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नियम स्पष्ट हैं कि ऐसी त्रुटि पाए जाने पर नामांकन पत्र तत्काल खारिज किया जाना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि संबंधित चुनाव निर्णय अधिकारियों ने बिना किसी आपत्ति के इन नामांकन पत्रों को वैध घोषित कर दिया। इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष ने इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव में निर्णय लिए जाने का आरोप लगाया है।
न्यायालय की शरण, याचिका दाखिल इस पूरे मामले को लेकर एडवोकेट प्रविण पाटील ने वसई न्यायालय में याचिका दाखिल की है। याचिका में संबंधित 23 नगरसेवक, चुनाव निर्णय अधिकारी और राज्य निर्वाचन आयोग को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि इन नगरसेवकों के नामांकन पत्रों को अवैध एवं असंवैधानिक घोषित कर उनकी सदस्यता रद्द की जाए। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के 2018 के ऐतिहासिक निर्णय का हवाला दिया है, जिसमें शपथपत्र के Verification कॉलम पर हस्ताक्षर न होने के कारण निर्वाचित प्रतिनिधियों की सदस्यता रद्द कर दी गई थी। इससे मौजूदा मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। जिन 23 भाजपा नगरसेवकों पर लटक रही है तलवार, याचिका में जिन भाजपा नगरसेवकों की सदस्यता रद्द हो सकती है, उनके नाम इस प्रकार हैं: रीना उमाकांत वाघ, सान्वी (अश्रिता) संजोग यंदे, रवि श्रीगोपाल पुरोहित, जितेश हरिश्चंद्र राऊत, गौरव वसंत राऊत, संजना गणेश भायदे, दर्शना अनिल त्रिपाठी, मेहुल अशोक शहा, हितेश नरेंद्र जाधव, नमिता प्रितेश पवार, जितेंद्र मनोहर पाटील, रसिका राजेंद्र ढगे, मनोज गोपाल पाटील, मीरा निकम, बंटी तिवारी, गणेश बालकृष्ण पाटील, हेमलता सिंह, ख्याती संदीप घरत, गंगेश्वरलाल श्रीवास्तव, अपर्णा पद्माकर पाटील, महेश सदाशिव सरवणकर, निम्मी निपुण दोषी, प्रदीप पवार। गौरतलब है कि इससे पहले भाजपा ने ही बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) के 16 नगरसेवकों की सदस्यता रद्द कराने के लिए अदालत का रुख किया था। अब वही स्थिति भाजपा के 23 नगरसेवकों पर आने से राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त हलचल मच गई है। महापौर चुनाव पर संकट, वर्तमान में महानगरपालिका में बहुजन विकास आघाड़ी – 71 नगरसेवक, भाजपा – 43 नगरसेवक, शिंदे गुट – 1 नगरसेवक निर्वाचित हैं। स्पष्ट बहुमत न होने के बावजूद महापौर और उपमहापौर पद के लिए आवेदन दाखिल किए जाने से जनता में भ्रम और असंतोष व्याप्त है। 3 तारीख को होने वाली सुनवाई और घटनाक्रम पर पूरे शहर की निगाहें टिकी हैं। इस पूरे प्रकरण ने आम नागरिकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — “कानून बड़ा है या राजनीति?”

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