रिपोर्टर – नजीर मुलाणी, वसई (पालघर ), महाराष्ट्र :- वसई – महाराष्ट्र में गुटखा, मिलावटी खाद्य पदार्थों, अवैध शराब बिक्री और नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाली विभिन्न गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इन कार्रवाइयों में ईमानदार और निर्भीक अधिकारी के रूप में पहचाने जाने वाले तुकाराम मुंढे का नाम एक बार फिर चर्चा में है। जनहित के लिए बिना किसी दबाव के कार्य करने वाले ऐसे अधिकारियों की सराहना हर स्तर पर हो रही है, लेकिन आज जनता के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा है – तुकाराम मुंढे अकेले कितनी जगह कार्रवाई करेंगे? राज्य के कई क्षेत्रों में आज भी खुलेआम गुटखा बेचा जा रहा है। विक्रेता बेखौफ होकर प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं और उपभोक्ता भी बिना किसी डर के उनका सेवन कर रहे हैं। यदि कानून का पालन केवल विक्रेताओं पर ही नहीं बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले हर व्यक्ति पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तभी इस सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाया जा सकता है। कई स्थानों पर मिलावटी दूध, पनीर, खाद्य पदार्थों, अवैध शराब और अन्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक गतिविधियों पर प्रशासन कार्रवाई कर रहा है। लेकिन इन कार्रवाइयों का शत-प्रतिशत परिणाम तभी दिखाई देगा जब स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आम नागरिक सक्रिय सहयोग करें। केवल समाचारों में कार्रवाई दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसका प्रभाव जमीन पर भी नजर आना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधि हों या शहरी क्षेत्रों के प्रभावशाली लोग, समाज में नशामुक्ति, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर भी उतनी ही मजबूती से आवाज उठानी होगी। सड़क, निर्माण या राजनीतिक विषयों पर आंदोलन होते हैं, लेकिन गुटखा, मिलावटखोरी और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर उतनी गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जाती? यह सवाल आम नागरिकों द्वारा उठाया जा रहा है। तुकाराम मुंढे जैसे अधिकारी अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना जनहित के लिए कार्य कर रहे हैं। ऐसे समय में नागरिकों को भी केवल दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रशासन को जानकारी देना, गैरकानूनी गतिविधियों की शिकायत करना और नशामुक्त समाज के निर्माण में भागीदारी निभानी चाहिए। जनता ही सबसे बड़ी ताकत है। यदि समाज का प्रत्येक नागरिक गुटखा-मुक्त, मिलावट-मुक्त और स्वस्थ महाराष्ट्र बनाने में योगदान दे, तो कोई भी अभियान सफल हो सकता है। आज जरूरत केवल एक अधिकारी की कार्रवाई की नहीं, बल्कि पूरे समाज के एकजुट होकर इस लड़ाई को मजबूत करने की है। आइए, हम सभी नशामुक्त, स्वस्थ और जागरूक महाराष्ट्र के निर्माण का संकल्प लें। गुटखा, मिलावटखोरी और अवैध धंधों के खिलाफ आवाज बुलंद करें तथा जनहित के लिए कार्य करने वाले ईमानदार अधिकारियों के साथ मजबूती से खड़े रहें।






