रिपोर्टर – रूपाली नामदेव, अमरावती, महाराष्ट्र :- महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, २०२६ में शुल्क वृद्धि और नए सिरे से थोपी गई शर्तों के विरोध में सूचना का अधिकार (RTI) कार्यकर्ता रोहित झाकर्डे ने आज दिनांक १९ जून २०२६ को अमरावती जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री और सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव को एक निवेदन सौंपा है। इस निवेदन में कहा गया है कि सूचना का अधिकार आवेदन, प्रथम अपील और द्वितीय अपील के शुल्क में की गई वृद्धि आम नागरिकों के सूचना पाने के अधिकार पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने जैसी है। साथ ही, सूचना मांगने के लिए कारण (प्रयोजन) बताना और नागरिकता का प्रमाण जोड़ना जैसी ये नई शर्तें सूचना का अधिकार अधिनियम, २००५ के मूल उद्देश्य में बाधा डालने वाली हैं, और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित (मर्यादित) करने जैसी हैं, ऐसा आरोप लगाया गया है। रोहित झाकर्डे ने अपने निवेदन में कहा है कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है और इससे शासन के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही (उत्तरदायित्व) पैदा होती है।” पारदर्शिता और जवाबदेही निर्माण करने के लिए ही यह कानून अस्तित्व में आया है। हालांकि, महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, २०२६ के कुछ प्रावधानों के कारण सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक खर्चीली और दमनकारी बन रही है, जिससे आम नागरिकों की आवाज दबाने का प्रयास किए जाने की भावना पैदा हो रही है। साथ ही, आर्थिक और प्रशासनिक बाधाएं खड़ी करने का मतलब पारदर्शिता के बजाय गोपनीयता को बढ़ावा देना है। इसलिए महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, २०२६ के अन्यायपूर्ण शुल्क वृद्धि और अवैध प्रावधानों को तुरंत रद्द करके पहले के आसान नियमों को यथावत लागू किया जाए, ऐसी दृढ़ मांग इस निवेदन के माध्यम से की गई है। मांग पूरी न होने पर सूचना का अधिकार कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक राज्यभर में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे और साथी अदालति मार्ग का सहारा लेंगे ऐसी चेतावणी रोहित झाकर्डेने दि हैं.




