रिपोर्टर – नजीर मुलाणी, वसई (पालघर), महाराष्ट्र :- वसई तहसीलदार कार्यालय से जुड़े चर्चित 7 लाख रुपये के रिश्वतकांड में फंसे अपर तहसीलदार विनोद बालकृष्ण धोत्रे को अब तक कोई राहत नहीं मिली है। अग्रिम जमानत के लिए दाखिल उनकी अर्जी पर अदालत ने एक बार फिर सुनवाई आगे बढ़ा दी है। वहीं, 21 अप्रैल को हुई कार्रवाई के बाद से धोत्रे अब तक फरार हैं, जिससे वसई में लोगों के बीच नाराजगी और चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। इस मामले में ठाणे एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने धोत्रे के निजी सहायक अनिल चौबळ को 7 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद चौबळ को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उसके खिलाफ अलग से सुनवाई जारी है। जांच के दौरान सामने आया कि वसई पूर्व स्थित एक अवैध निर्माण पर कार्रवाई न करने के बदले 7 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इतना ही नहीं, संबंधित जमीन को ‘एनए’ (नॉन एग्रीकल्चर) करने के लिए करीब 40 लाख रुपये की मांग किए जाने का भी आरोप शिकायतकर्ता ने लगाया है। शिकायत मिलने के बाद ACB ने जाल बिछाकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई के तुरंत बाद अपर तहसीलदार विनोद धोत्रे फरार हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि हत्या, डकैती और अन्य गंभीर मामलों के आरोपियों को 24 से 48 घंटे में पकड़ने वाली जांच एजेंसियां आखिर एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को लगभग तीन सप्ताह बाद भी क्यों नहीं पकड़ सकीं? वसई में अब लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं — “धोत्रे आखिर कहां हैं?”, “क्या वे महाराष्ट्र से बाहर फरार हो चुके हैं?”, “क्या उन्हें किसी का संरक्षण मिल रहा है?” अग्रिम जमानत याचिका पर लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन अदालत ने अभी तक कोई राहत नहीं दी है। कानूनी जानकारों का मानना है कि मामले की गंभीरता और जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए धोत्रे को राहत मिलना आसान नहीं होगा। इस पूरे मामले के बाद वसई में एक ही चर्चा है — “क्या कानून सबके लिए समान है?” “एक सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों?” “क्या अदालत इस मामले में सख्त रुख अपनाएगी?” अब पूरे वसई की नजर अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। फरार अपर तहसीलदार विनोद धोत्रे की गिरफ्तारी होगी या उन्हें कानूनी राहत मिलेगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। इस प्रकरण ने एक बार फिर महसूल विभाग में भ्रष्टाचार के मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है।






