रिपोर्टर – नजीर मुलाणी, पालघर, महाराष्ट्र :- पालघर जिला परिषद स्कूलों में आदर्श शिक्षक पुरस्कार के चयन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप और सिफारिश का खुला खेल चल रहा है। पुरस्कार वितरण से ठीक पहले सोमवार दोपहर तक अंतिम सूची में शामिल एक योग्य शिक्षिका का नाम अचानक हटाकर दूसरी शिक्षिका का चयन कर लिया गया, जिससे जिला परिषद प्रशासन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शिक्षक वर्ग में चर्चा है कि एक प्रभावशाली विधायक की पसंद की शिक्षिका को प्राथमिकता देने के लिए पूरी प्रक्रिया बदली गई। इस कथित हस्तक्षेप से ईमानदारी से काम करने वाले शिक्षकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि यह विवाद केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े स्तर पर अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले भी एक वरिष्ठ अधिकारी के स्वागत के नाम पर जिला परिषद स्कूलों की शिक्षिकाओं से प्रति व्यक्ति 1200 रुपये कथित तौर पर अवैध रूप से वसूले जाने का मामला सामने आया था, जिस पर काफी आलोचना हुई थी।
पीड़ित शिक्षिकाओं ने आरोप लगाया है कि इन सभी कथित वसूली और पुरस्कार चयन में फेरबदल के पीछे शिक्षक रवींद्र हरेश्वर घरत की भूमिका है। आरोप यह भी है कि वसई तालुका के जानकीपाड़ा जिला परिषद स्कूल में नियुक्त होने के बावजूद वह नियमित रूप से स्कूल में उपस्थित नहीं रहते और अधिकतर समय वसई पंचायत समिति के शिक्षा विभाग में अनधिकृत रूप से बैठकर लिपिकीय कार्य करते दिखाई देते हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत भी पालकों ने पहले की थी। इस पूरे मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता एलायस डिसिल्वा ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मांग की है कि पुरस्कार वितरण से पहले सभी पात्र शिक्षकों की फाइलों की पारदर्शी तरीके से पुनः जांच की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि पहली सूची में शामिल शिक्षिका का नाम किसके दबाव में हटाया गया, इसकी उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में कथित सिफारिश और अनियमितताओं को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। सभी की नजरें अब जिला परिषद प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।






