रिपोर्टर – संजय पुरी, सी–79 भरौली जंक्शन पर स्वीकृत आरयूबी में देरी, रेलवे की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, भरौली खुर्द और भरौली कलां के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधा के अभाव में भारी परेशानियां झेलने को मजबूर हैं। सी–79 भरौली जंक्शन पर अंडरपास (आरयूबी) स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। ताजा मामला बीते रविवार का है, जब भरौली खुर्द निवासी नारदेई नामक महिला का निधन हो गया। परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशानघाट लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में भरौली जंक्शन का फाटक बंद मिला। काफी देर इंतजार के बाद भी फाटक न खुलने पर परिजन और ग्रामीणों को लगभग 200 मीटर आगे बनी पुली के रास्ते शव निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और रेलवे की लापरवाही को उजागर कर दिया है। गांव भरौली कलां के रिटायर्ड डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर दर्शन कुमार ने बताया कि दोनों गांवों की संयुक्त आबादी करीब 10 हजार है और उनके बीच संपर्क का मुख्य मार्ग यही फाटक है। इस रूट से कटड़ा, अमृतसर, पठानकोट सिटी और पठानकोट कैंट की ओर जाने वाली कई ट्रेनें गुजरती हैं, जिससे फाटक अधिकांश समय बंद रहता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में उन्होंने स्वयं इस स्थान पर आरयूबी बनवाने की पहल की थी। रेलवे ने फाटक के समीप आरयूबी को मंजूरी भी दे दी, लेकिन निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया। देरी के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों से लेकर आपात स्थितियों में भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। दर्शन कुमार ने बताया कि हाल ही में रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू को भी स्वीकृत आरयूबी का कार्य शीघ्र शुरू करवाने के लिए ज्ञापन सौंपा गया है। अब ग्रामीणों की निगाहें रेलवे प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब इस लंबे समय से लंबित परियोजना को धरातल पर उतारा जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक आरयूबी का निर्माण नहीं होता, तब तक ऐसे हालात दोबारा भी उत्पन्न हो सकते हैं। प्रशासन से मांग की जा रही है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े।






