रिपोर्टर – नंदकिशोर मते, अमरावती, महाराष्ट्र :- सकल मातंग समाज को 1961 की जनगणना के अनुसार उप-वर्गीकरण के आधार पर अ, ब, क, ड के तहत स्वतंत्र आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिए तिवसा तालुका सकल मातंग समाज ने हाल ही में तिवसा तहसीलदार को एक निवेदन सौंपा है।
1961 के सर्वेक्षण के अनुसार, मातंग समाज की कुल जनसंख्या 30% थी। लेकिन 2011 के सर्वेक्षण के अनुसार, ‘बार्टी’ (BARTI) संस्थान द्वारा दी गई रिपोर्ट में मातंग समाज की जनसंख्या 19% दिखाई गई है। जनसंख्या के इस बड़े अंतर के कारण उप-वर्गीकरण से मातंग समाज का नुकसान नहीं होना चाहिए। मातंग समाज के संबंध में महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिए गए उप-वर्गीकरण (अ, ब, क, ड) के निर्णय का हम स्वागत करते हैं। आरक्षण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, यह संकल्पना विश्वरत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की थी। लोकशाहीर अन्नाभाऊ साठे ने भी शोषितों, पीड़ितों और मजदूर वर्ग के लिए बहुमूल्य योगदान दिया। लेकिन उसके बाद मातंग समाज की शिक्षा की प्रगति धीमी हो गई। इस उप-वर्गीकरण से समाज को सही दिशा मिलेगी और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति होगी, ऐसा इस निवेदन में कहा गया है। तिवसा तहसीलदार को यह निवेदन देते समय गुरुदेव नगर के पूर्व उपसरपंच किरण खंडारे, मोझरी के उपसरपंच प्रशांत प्रधान, समाज के वरिष्ठ कार्यकर्ता देवीदासराव गायकवाड़, दिलीप वानखड़े, गोपाल वानखड़े, मारुति झोबाड़े, दामोदर प्रधान, सुनील इंगोले, शरद हिवराले, जनार्दन वानखड़े आदि उपस्थित थे।






