रिपोर्टर – नजीर मुलाणी, वसई (पालघर), महाराष्ट्र :- भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग (एसीबी), ठाणे ने वसई तालुका में 7 लाख रुपये की रिश्वत लेते समय एक बाह्य कर्मचारी को रंगेहाथ पकड़ लिया। यह रिश्वत अपर तहसीलदार कार्यालय से जुड़े एक प्रकरण को निपटाने के लिए मांगी गई थी। मामले में संबंधित अधिकारी की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता की जमीन पर हुए कथित अनधिकृत निर्माण का मामला निपटाने के लिए आरोपी ने शुरुआत में 10 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद रकम 7 लाख रुपये तय की गई। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत सीधे एंटी करप्शन ब्यूरो, ठाणे परिक्षेत्र में दर्ज कराई। शिकायत की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने सापळा (ट्रैप) रचकर 21 अप्रैल 2026 को कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी खाजगी इसम अनिल प्रभाकर चौबल (बाह्य कर्मचारी) ने शिकायतकर्ता से 7,00,000 रुपये स्वीकार किए, तभी एसीबी टीम ने पंचों की मौजूदगी में उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह रिश्वत अपर तहसीलदार (अव्वल) कार्यालय में लंबित प्रकरण निपटाने के लिए मांगी गई थी। इस संदर्भ में संबंधित अधिकारी विनोद बालकृष्ण धोत्रे (अपर तहसीलदार – अव्वल, वसई) की भूमिका की भी जांच जारी है। इस मामले में मिरा-भाईंदर वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आगे की जांच जारी है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई पुलिस निरीक्षक रुपाली पोळ (लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग, ठाणे) के मार्गदर्शन में की गई। साथ ही शिवराज पाटील (पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो, ठाणे), सुहास शिंदे (अपर पुलिस अधीक्षक, एसीबी ठाणे) तथा भागवत सोनावणे (अपर पुलिस अधीक्षक, एसीबी ठाणे) के मार्गदर्शन में सापळा सफलतापूर्वक राबवाया गया। लाचलुचपत प्रतिबंधक विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी शासकीय काम के लिए रिश्वत मांगी जाए तो तुरंत शिकायत करें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी, ऐसा विभाग ने स्पष्ट किया है।





