समाज के विभिन्न हिस्सों में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें अक्सर अगरबत्तियों, सिंदूर, बीड़ी और मोमबत्ती के पैकेटों पर देखी जाती हैं। उपयोग के बाद ये अगरबत्ती, बीड़ी और सिंदूर के पैकेट सड़कों पर पड़े हुए या कूड़ेदान में फेंके हुए दिखाई देते हैं। इस विषय पर मंच के कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है— “हमारा मानना है कि यह हमारे धर्म और हमारे देवी-देवताओं का अपमान है। हिंदू समाज के पूजनीय देवी-देवताओं की तस्वीरें कभी-कभी बाथरूम, सीवर या सड़क के किनारे पड़ी हुई दिखाई देती हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा— “हमने इसका कड़ा विरोध किया है और जब तक यह प्रक्रिया पूरी तरह से बंद नहीं हो जाती, हम अपना संघर्ष जारी रखेंगे। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि विभिन्न वस्तुओं पर हमारे देवी-देवताओं की कोई भी छवि न हो।” मंच के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि यह प्रक्रिया बंद नहीं की गई, तो उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा। आज के इस कार्यक्रम में विश्व मंदिर के संस्थापक भी उपस्थित थे। इस प्रेस वार्ता में सेवाश्रम संघ, समरेश्वर महाराज, तंत्र साधक स्वामी तंत्र महाराज, एंड “सुदर्शन दत्त” (हिंदुत्व फाइटर एवं सोशल वर्कर) तथा “ममता सरकार गांगुली” (हिंदुत्व सोशल वर्कर) मौजूद रहे।







