रिपोर्टर – संजय पुरी, बच्चों की आस्था और संस्कार बने क्षेत्र में चर्चा का विषय। जहां एक ओर राम मंदिर स्थापना दिवस के अवसर पर देश – विदेश में भंडारों, कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, वहीं दूसरी ओर निकटवर्ती गांव भरौली कलां के कुछ नन्हे बच्चों ने अपनी मासूम आस्था और संस्कारों से सभी का दिल जीत लिया। गांव के छोटे बच्चों ने अपनी जेब खर्च और आपसी उगाही से तीसरे वर्ष भी राम मंदिर स्थापना दिवस को सेवा भाव के साथ मनाया। बच्चों ने बिस्कुटों का स्टाल लगाकर संगत में बिस्कुट वितरित किए और भगवान राम के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा प्रकट की। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना के दिन से ही इन बच्चों ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। पहले वर्ष बच्चों ने माता-पिता से मिलने वाली पॉकेट मनी से पूरे गांव में शोभायात्रा निकाली और बिस्कुट बांटे। दूसरे वर्ष भी उन्होंने इसी भावना के साथ कार्यक्रम आयोजित किया और इस वर्ष लगातार तीसरे साल अपनी आस्था को कर्म में बदल दिया। छोटे बच्चे कार्तिकेय सड़माल, अरमान सड़माल और नूर ने बताया कि वे पिछले 10 दिनों से रोज स्कूल जाते समय मिलने वाले पैसे बचा रहे थे। कार्तिकेय ने बताया कि उसने 490 रुपये, अरमान ने 210 रुपये और नूर ने 170 रुपये जमा किए। इसके अलावा उन्होंने अपने परिवारजनों से भी सहयोग लेकर करीब 550 रुपये और एकत्र किए। इस तरह सभी पैसों से बच्चों ने डेढ़ पेटी बिस्कुट खरीदे और राम मंदिर स्थापना दिवस पर श्रद्धालुओं में वितरित किए। बच्चों का कहना है कि यह कार्य वे किसी दिखावे के लिए नहीं बल्कि भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धा और खुशी व्यक्त करने के लिए करते हैं। कार्तिकेय सड़माल और अरमान ने भावुक होकर बताया कि उनका सपना है कि वे हर वर्ष राम मंदिर स्थापना दिवस पर इसी तरह मिठाइयां और उपहार बांटकर सेवा कार्य करते रहें। नन्हे हाथों से की गई यह छोटी-सी पहल आज पूरे क्षेत्र में आस्था, संस्कार और सेवा भाव की मिसाल बन गई है। गांव के लोग इन बच्चों की सराहना करते नहीं थक रहे और कह रहे हैं कि ऐसे संस्कार ही समाज का भविष्य संवारते हैं।






