रिपोर्टर : पोराग ज्योति फुकन, गोलाघाट, असम, यह सांस्कृतिक परियोजना एक वृक्ष पर आधारित है, जिसके केंद्र में महापुरुष का गुरु आसन है और वहां से भवनों की सभी शाखाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। यह परियोजना असम की पारंपरिक वास्तुकला और सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ-साथ महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की जीवनी को व्यापक रूप से दर्शाती है। परियोजना के भवनों का निर्माण विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों, नृत्य शैलियों और जीवन शैली के चित्रों के रूप में किया गया है। इसके अतिरिक्त, भगवान कृष्ण के जीवन, नाटकों, भाओना आदि पर प्रदर्शनियां लगाई गईं, कला केंद्र, भोजनालय, आवास आदि स्थापित किए गए। पर्यटकों के ठहरने के लिए यात्री छात्रावास, आदिवासी यात्री छात्रावास, पर्यटकों और कर्मचारियों के लिए चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाला स्वास्थ्य केंद्र, असमिया राष्ट्रीय जीवन से जुड़ी नामघर संस्कृति के कलात्मक पहलू से पर्यटकों को परिचित कराने के लिए मणिकंचन घर, और बटद्वार थाना में मणिकंचन जैसी अन्य सुविधाएं भी परियोजना के अंतर्गत आती हैं। इस परियोजना में जल स्तर नियंत्रण, सुरक्षा निगरानी टावर, फुटपाथ, पार्किंग स्थल आदि शामिल हैं। बटद्वार थाना के विकास से यह क्षेत्र एक सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल बन जाएगा। इस प्रयास से महापुरुष के अमर कार्यों, जीवन दर्शन और सांस्कृतिक चेतना को नई पीढ़ी और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा। यह परियोजना असम में आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र को भी और विकसित करेगी। इससे घरेलू और विदेशी पर्यटकों को महापुरुष के बारे में अधिक जानने के अवसर मिलेंगे।









