रिपोर्टर – संजय पुरी, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में यूनिक होली हार्ट स्कूल, शिवनगर, ढाकी रोड, पठानकोट में आयोजित पाँच दिवसीय श्री कृष्ण कथा के द्वितीय दिवस का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिन्होंने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं, उनके दिव्य संदेशों एवं भक्ति मार्ग के गूढ़ रहस्यों का भावपूर्वक श्रवण किया। द्वितीय दिवस की कथा में गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री गौरी भारती जी ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायक प्रवचनों के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण जी की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के उपदेश केवल भौतिक जीवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आध्यात्मिक जगत से जुड़कर मानव जीवन को परम लक्ष्य की ओर अग्रसर करते हैं। श्री कृष्ण का प्रत्येक संदेश आत्मा को जागृत करने वाला और मनुष्य को सत्य, प्रेम एवं करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला है। साध्वी जी ने कथा प्रसंग के माध्यम से विदुर जी की अनुपम भक्ति का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विदुर जी का जीवन इस बात का प्रतीक है कि भगवान को प्राप्त करने के लिए न तो ऐश्वर्य आवश्यक है और न ही उच्च पद, बल्कि सच्चा प्रेम, निष्कलंक भाव और निष्काम भक्ति ही पर्याप्त है। विदुर जी ने राजमहल के वैभव को त्यागकर सादगी और सेवा को अपनाया। जब भगवान श्री कृष्ण हस्तिनापुर आए, तो राजसी ठाठ-बाट को छोड़कर विदुर जी की कुटिया में प्रेमपूर्वक ठहरे। यह प्रसंग दर्शाता है कि भगवान को भक्ति का स्वाद अत्यंत प्रिय है, न कि भोग-विलास। विदुर जी द्वारा प्रेमभाव से अर्पित किए गए सादे भोज को स्वीकार कर भगवान श्री कृष्ण ने यह संदेश दिया कि जहां सच्चा भाव होता है, वहीं ईश्वर का वास होता है। कथा के दौरान साध्वी जी ने ब्रह्मज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान सकता है। जब आत्मा अपने परम स्रोत परमात्मा से जुड़ती है, तभी जीवन के दुःख, भय और अज्ञान का अंत होता है। भगवान श्री कृष्ण का उपदेश यही है कि मनुष्य शरीर को ही सब कुछ न माने, बल्कि आत्मा की पहचान कर परम सत्य की ओर बढ़े। ब्रह्मज्ञान से युक्त भक्ति ही जीवन को सार्थक बनाती है। सभा के दौरान साध्वी जगदीशा भारती, साध्वी हरिता भारती, साध्वी आरती, साध्वी प्रभु ज्योति, यशा भारती, सहित अन्य साध्वियों ने मधुर एवं भावपूर्ण भजनों का गुणगान किया। भजनों की स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन हो गए। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कथा से प्राप्त आध्यात्मिक संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन विधिवत आरती के साथ किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से सहभागिता कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। उल्लेखनीय है कि यह पाँच दिवसीय श्री कृष्ण कथा आगामी दिनों में भी प्रतिदिन निर्धारित समय पर आयोजित की जा रही है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन, लीलाओं एवं ब्रह्मज्ञान पर आधारित अमूल्य प्रसंगों का विवेचन किया जाएगा।







