रिपोर्टर:- नंदकिशोर मते, अमरावती, महाराष्ट्र, राष्ट्रीय प्रबोधनकार प्रज्वलदादा टोंगे ने सामुदायिक प्रार्थना का महत्व बताया है। उनके अनुसार, प्रार्थना मनुष्य को शुद्ध करने का एक साधन है और यह केवल ईश्वर के स्मरण के लिए नहीं है, बल्कि मन, बुद्धि और आचरण को शुद्ध करने का एक सामूहिक प्रयास है। टोंगे ने कहा कि ईश्वरभक्ति केवल शब्दों से की गई स्तुति नहीं है, बल्कि समाज के लिए प्रेम, सेवा और करुणा का आचरण में उतरा हुआ भाव है। प्रार्थना मनुष्य को सिखाती है कि हम सभी एक ही सृष्टि के बच्चे हैं और भेदभाव, अहंकार और स्वार्थ से परे जाकर प्रत्येक में परमेश्वर देखने की भावना ही सच्ची प्रार्थना है। यह प्रतिपादन राष्ट्रसंत श्री तुकडोजी महाराज के स्मृतिदिन के अवसर पर आयोजित सप्ताह में किया गया है। इस सप्ताह में श्रीगुरुदेव सर्वांगीण बाल सुसंस्कार शिविर आयोजित किया गया है, जिसमें बच्चों में संस्कार का बीज रोपने का राष्ट्रभक्ति का कार्य पिछले 16 वर्षों से चल रहा है। शिविर का चौथा दिन था, जो रवीदादा मानव के मार्गदर्शन में चल रहा है। शिविर प्रमुख मुकेश कोल्हे, मुख्य शिक्षक ग्रामगीताचार्य हनुमंत ठाकरे, तुलसीदास झुंजुरकार, प्रज्वल टोंगे, मुन सर और अन्य शिक्षकों के सहयोग से यह शिविर चल रहा है।







