मुंबई मनपा माध्यमिक विभाग में ग्रामीण महाराष्ट्र के गुणवत्ताधारक डी.एड. शिक्षकों के साथ अन्याय – सम्मान की लड़ाई जारी

रिपोर्टर- नजीर मुलाणी, मुंबई, महाराष्ट्र, बृहन्मुंबई महानगरपालिका के माध्यमिक विभाग में ग्रामीण महाराष्ट्र से आए डी.एड. प्रशिक्षित शिक्षकों के साथ लगातार हो रहा अन्याय और उपेक्षा अब खुलकर सामने आ रही है। जैसे DCPS/NPS/DC-1 के अंतर्गत आर्थिक सन्मान के लिए शिक्षक संघर्ष कर रहे हैं, उसी प्रकार अब डी.एड. शिक्षक सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान पुनः प्राप्त करने के लिए आंदोलनरत हैं। 2009 से पदवीधर वेतनश्रेणी से वंचित महाराष्ट्र के अनेक डी.एड. प्रशिक्षित शिक्षक जिन्होंने निर्धारित समय में स्नातक (Graduation) और बी.एड. की उपाधि प्राप्त की, उन्हें 2009 से अब तक पदवीधर वेतनश्रेणी (Graduate Pay Scale) से वंचित रखा गया है। यह न केवल आर्थिक अन्याय है, बल्कि शिक्षकों की मेहनत और योग्यता का भी अपमान है।
नियमविरुद्ध समायोजन और धमकियाँ शिक्षकों का आरोप है कि विभाग द्वारा वेतन रोकने की धमकी देकर डी.एड. शिक्षकों को 9वीं और 10वीं कक्षा में अन्य माध्यमों में जबरन समायोजित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल या नियमों का पालन नहीं किया जाता।
विभाग की विसंगति यह है कि जहाँ बी.एड. शिक्षकों को 6वीं से 8वीं कक्षा तक सीमित किया गया है, वहीं डी.एड. शिक्षकों से 9वीं और 10वीं का अध्यापन करवाया जा रहा है। यह न केवल शिक्षा के मानकों के खिलाफ है, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ है। डी.एड. शिक्षक, जिन्होंने समय पर डिग्री प्राप्त की है, उन्हें वेतनश्रेणी न देने के कारण अतिरिक्त शिक्षक घोषित किया जा रहा है। नतीजतन, मराठी या हिंदी माध्यम से नियुक्त होने के बावजूद वे अंग्रेजी माध्यम में अध्यापन करने को मजबूर हैं। एस.एस.सी. बोर्ड के परीक्षा उत्तरपत्रिका मूल्यांकन कार्य में भी डी.एड. शिक्षकों से बिना किसी प्रशिक्षण के काम लिया जा रहा है। इससे छात्रों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। माध्यमिक मुख्याध्यापक का पद गजेटेड (Gazetted) है, परंतु विभाग बी.एड. शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी करते हुए डी.एड. धारकों को प्रभारी मुख्याध्यापक बना रहा है, जो नियमविरुद्ध है। कुछ डी.एड. शिक्षकों को अनधिकृत रूप से शालेय प्रशासकीय अधिकारी (Clerical Duty) बना दिया गया है, जिससे उनसे विभिन्न ऑनलाइन कार्य करवाए जा रहे हैं। विभाग ने 2008, 2009, 2011 और 2012 की भर्ती से लेकर आज तक डी.एड. और बी.एड. शिक्षकों की स्वतंत्र बिंदूनामावली (Seniority List) जारी नहीं की है, जिससे अनेक विवाद और भ्रम की स्थितियाँ बनी हुई हैं। शिक्षकों की प्रमुख मागें : 1. डी.एड. शिक्षकों की अद्ययावत सेवाजेष्ठता यादी (Updated Seniority List) तुरंत प्रकाशित की जाए। 2. पदवीधर वेतनश्रेणी पात्र शिक्षकों को पदवी प्राप्त वर्ष से पूर्वलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू की जाए। 3. बृहन्मुंबई प्राथमिक शाळा के अनुसार, अतिरिक्त डी.एड. शिक्षकों के समायोजन की जबाबदारी उपसंचालक कार्यालय को दी जाए और उनके शालार्थ आयडी (School IDs) नियमित रूप से जारी किए जाएँ। “लड़ाई केवल डी.एड. शिक्षकों की नहीं, यह हमारे सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा की लड़ाई है।”

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