आखिर कब तक मासूमों के साथ ऐसा ही होता रहेगा?

ggदिल्ली, राहुल मालपानी : इन्सान और जानवर में फ़र्क़ होना चाहिए और है भी। परन्तु कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ जो हुआ उससे यही लगता है कि इन्सान होना एक गाली है। जानवर कहीं अच्छे हैं। ऐसा शायद ही कोई होगा जो इस हृदयविदारक कुकृत्य की जघन्यता से भावुक न हुआ हो। परन्तु यह मैं भावनाओं को अलग रख कर कहना चाहता हूँ कि अपराधियों को ऐसा दण्ड मिलना चाहिए कि उनका उदाहरण हमें पीढ़ी दर पीढ़ी याद रहे। एक और चीज़। जो लोग अपराधियों को धर्म की आड़ में शरण देना चाहते हैं, उन्हें यह पता होना चाहिए कि वे भी अपराधियों की ही श्रेणी में गिने जाएगें। आपका समर्थन यह दर्शाता है कि समय आने पर आप भी ऐसे कुकृत्य करने में सक्षम हैं। निर्णय लें कि आप किनके प्रतिनिधि बनना चाहते हैं। कृपया अपने धर्म और देश के नाम पर ऐसा कलंक न पोतें जिसके हम न चाहते हुए भी भागीदार बनें। अरे! दो मिनट उस परिवार का तो सोचो जिसकी 8 साल की बेटी उनसे इस नृशंसता के साथ छीन ली गयी। कम से कम मैं चाहूंगा कि कानून अपना काम करे और दोषियों को उपयुक्त सबक सिखाये।

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