त्रिपुरा में भी झंडे गाड़ने की तैयारी में भाजपा

मुंबई, महाराष्ट्र/नगर संवाददाताः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार के तीन साल पूरे होने की रैली इस बार पूर्वोत्तर राज्यों का प्रवेशद्वार कहे जाने वाले शहर गुवाहाटी में करेंगे। यह रैली असम के पड़ोसी राज्य त्रिपुरा के लिए एक संदेश भी होगी, जहां पिछले 23 वर्षो से लगातार माकपा की सरकार है। 2013 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में माकपा को राज्य की कुल 60 में से 50 सीटें हासिल हुई थीं। 10 सीटें कांग्रेस को मिली थीं। तब त्रिपुरा में भाजपा को मात्र 1.5 फीसद वोट मिले थे। जबकि दो दिन पहले रविवार को राज्य के पहाड़ी जिले ऊनाकोटी के कुमारघाट में हुई भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली में 25,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए। त्रिपुरा भाजपा के प्रभारी सुनील देवधर बताते हैं कि इससे पहले राजधानी अगरतला के विवेकानंद मैदान में हुई रैली में 40,000 लोग शामिल हुए थे। संभवत: इस प्रकार राज्य में भाजपा की बढ़ती ताकत का अंदाजा लगाकर ही त्रिपुरा के एक सांसद जितेंद्र चौधरी ने पिछले दिनों एक बयान में कहा था कि राज्य में भाजपा को रोकने के लिए माकपा, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस एवं सभी जनजातीय दलों को एक साथ आ जाना चाहिए। त्रिपुरा के आसपड़ोस का बदलता राजनीतिक माहौल भी वहां भाजपा को मजबूती प्रदान कर रहा है। राज्य की 38 लाख की आबादी में 21 लाख मतदाता हैं। इनमें चार विधानसभा क्षेत्रों के दो लाख मतदाता मणिपुरी हैं। मणिपुर में हाल ही में 15 वर्षो के कांग्रेस शासन को हटाकर भाजपा की सरकार बनी है। इस बदलाव का असर उक्त चार विधानसभा क्षेत्रों पर नजर आ रहा है। इसी प्रकार ऊनाकोटी एवं धरमनगर जिलों की 13 विधानसभा सीटों पर असमिया आबादी अधिक है। इस पर पिछले साल असम में हुए सत्ता परिवर्तन का असर दिख रहा है। त्रिपुरा की कुल आबादी में 68 फीसद बांग्लाभाषी एवं 32 फीसद जनजातीय है। बांग्लाभाषियों में 40 फीसद अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं, जो अपना कुलनाम नाथ और देबनाथ लिखते हैं। ये वर्ग नाथ संप्रदाय को मानता है। त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय के 15 से ज्यादा मंदिर हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस वर्ग का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा है। दूसरी ओर, राज्य की 20 में से 12 जनजातीय सीटों पर भी भाजपा अपनी मजबूती का दावा कर रही है। इस प्रकार राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण 15 वर्षो से मुख्यमंत्री पद पर काबिज माकपा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार की दिक्कतें बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

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