मानव में क्रांति व विश्व में शांति केवल मात्र ब्रह्मज्ञान द्वारा ही संभव है स्वामी चिन्मयानंद जी।

रिपोर्टर संजय पुरी दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थानीय आश्रम पठानकोट में टीम युवा परिवार सेवा समिति की ओर से "संकल्प 2025" नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया , कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए "युवा परिवार सेवा समिति" के जसवीर सिंह ने बताया, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एक आध्यात्मिक और सामाजिक संस्थान हैं, संस्थान की ओर से पठानकोट क्षेत्र में समय-समय पर आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला तहित कार्यक्रम होते ही रहते हैं, जिससे जनमानस को सनातन ज्ञान ( ब्रह्मज्ञान ) के बारे में बताया जाता है, इस सभा में लगभग 600 लोगों उपस्थित रहे, और उन्हें संबोधन करते हुए सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी चिन्मयानंद जी ने कहा "संकल्प 2025" कार्यक्रम हम सभी के भीतर एक नए उत्साह व ऊर्जा को जाग्रत करता है, गुरुदेव द्वारा प्राप्त ब्रह्मज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना कार्यक्रम का उद्देश्य है, ब्रह्मज्ञान के द्वारा ही सभ्य समाज की रचना की जा सकती है, क्योंकि संसार में रहते हुए प्रत्येक इंसान के लिए "संकल्प शक्तिवान होना बहुत जरूरी है, यदि आप किसी लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, उसे संकल्प शक्ति के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता, जब एक साधक दृढ़ संकल्प धारण करता है, तो वह गुरु कृपा से नामुमकिन काम को भी मुमकिन कर सकता है, संकल्पशक्ति के द्वारा ही असंभव को संभव किया जा सकता है, जैसे जब आचार्य चाणक्य जी ने अखंड भारत के स्वप्न का संकल्प धारण किया और उसे पूर्ण करने के लिए चंद्रगुप्त मौर्य के मन में उत्साह , उमंग आदि दैविकगुणो का संचार किया, जब भक्ति पथ पर चलता हुआ साधक किसी श्रेष्ठ काम के लिए संकल्प धारण करता है, और साथ ही नियमित रूप से अपने गुरु के चरणों में प्रार्थना व ध्यान साधना में रत रहता है, तब गुरु उसके प्रत्येक संकल्प को पूर्ण करते हैं, आज श्री आशुतोष महाराज जी का संकल्प है जन-जन को ब्रह्मज्ञान प्रदान करके उनके भीतर सोई हुई शक्ति को जाग्रत करना व वास्तविक शांति प्रदान करना है श्री गुरु महाराज जी सदैव हमें संबोधन करते हुए कहते हैं "मानव में क्रांति व विश्व में शांति केवल मात्र ब्रह्मज्ञान द्वारा ही संभव है" इसी संकल्प शक्ति को जन-जन के भीतर रोपति करना इस सभा का उद्देश्य है, हमें श्री गुरु महाराज जी के दिव्य सपने को साकार करने हेतु अपने कर्तव्य निभाने का संकल्प धारण करना होगा, समाज में बहुत प्रकार की कुरीतियों पनप रही हैं, चाहे युवाओं में बढ़ता नशा हो, नारी शोषण हो या पर्यावरण का दोहन, ऐसी कितनी ही बुराइयां हैं जिन्हें जड़ से समाप्त करने के लिए प्रत्येक इंसान को संकल्प धारण करना होगा, यदि हम सभी संगठित होकर व दृढ़ संकल्पित होकर किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो उसमें हमें निश्चय ही विजयश्री का वर्णन होता है, कार्यक्रम के अंत में स्वामी हरीशानंद जी ने सभा को संबोधन करते हुए कहां कि प्रत्येक ब्रह्मज्ञानी साधक को गुरु आज्ञा में रहते हुए, सेवा, सुमिरन, साधना व सत्संग के साथ जुड़े रहना चाहिए, गुरु की आज्ञा ही एक शिष्य के कल्याण का मार्ग खोलती हैं, गुरु आज्ञा में चलकर ही शिष्य गुरु के अलौकिक प्रेम को प्राप्त करता है, अतः सभी साधक ऊर्जावान व उत्साहित रहते हुए विश्व शांति के सपने को साकार करने का संकल्प धारण करें, इसी अवसर पर युवा परिवार सेवा समिति के युवा भाइयों द्वारा प्रेरणादायक सुमधुर भजनों का गुणगान किया गया, इसी अवसर पर उपस्थित भक्तजनों ने विश्व कल्याण की मंगल कामना हेतु ध्यान साधना की और साधकों के लिए कार्यक्रम के पश्चात भोजन भंडारे का प्रबंध भी किया गया ।