भारत की अत्यन्त पुरातन विद्या आनापान सती कार्यक्रम कराया

नई दिल्ली, वी.के. पाण्डेयः जब से इस देश में बाहरी लोगों का गलत इरादे से आगमन हुआ और उन्होंने इस देश के लोगों को गुलाम बनाने के लिए हिंसा, सैन्य बल आदि का सहारा लिया था। आज भी हमारे देश के लोगों को सुधारने के लिए तथा शांति स्थापित करने के लिए सहारा लिया जाता है। जबकि इस देश कि यह महानता है की यहां असंख्य बरसों से जन्मे महामानवों, महात्माओं ने यह सिखाया है कि घृणा से घृणा कम नहीं होती, घृणा प्रेम से घटता है, क्योंकि क्रोधित रहना किसी और पर फेकने के इरादे से एक गरम कोयले को अपने हाथ में रखने के समान है जो हमें ही जलाता है। इस प्रकार बहार-बाहर भटकने से हमें कभी शांति नहीं प्राप्त हो सकती। आप चाहे कितने भी पवित्र शब्दों को पढ़ या बोल ले, लेकिन जब तक वह जीवन में नहीं उतरे उनका कोई लाभ नहीं है। बुराई मिटाने की शुरूआत हमें अपने भीतर से करनी होगी। क्योंकि विकार सबसे पहले हमारे मन से अन्दर जागते है। मन शुद्ध हो जाए तो गलत कार्य होगा ही नहीं। अगर किसी देश का भविष्य प्रकाशित करना है तो उस देश के बच्चों को सुधारना नित आवश्यक है, क्योंकि बच्चें ही तो मुख्य आधार है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए सभी समस्याओं से गुजरते हुए दिल्ली के कुछ लोगों ने मिलकर सोनिया विहार के राजकीय उच्चतम माध्यमिक बाल विद्यालय में जिनमें श्री मुन्नी लाल दोहरे (उप प्रधानाचार्य) एवं प्रधानाचार्य जी, राजेश किराने वाला, रणजीत सिंह, राजिन्दर गौतम, मुनेश देवी, सत्यवीर सिंह, देविन्दर सिंह, अनिल गुप्ता, दौलत राम का नाम प्रमुख है।

इस शिविर को संचालित करने में विपस्सना साधना संस्था 10वां तल, हेम कुंट टावर, नेहरू प्लेस दिल्ली से बाल शिविर के आचार्य श्री हरिश तिवारी एवं रणजीत सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई। इस विद्यालय से लगभग 3500 छात्रों एवं शिक्षक को दिल्ली में पहली बार भारत की अत्यन्त पुरातन विद्या (आनापान सती) से परिचित कराया गया। आनापान सती से तात्पर्य अपनी ही नासिका के द्वारों से आने जाने वाली प्राकृतिक सांसों के प्रति सजगता के अभ्यास से है। इस साधना का नियमित अभ्यास करने से हमारा मन एकाग्र एवं शांति होने लगता है। हम ज्यादा सजग रहने लगते हैं, विद्यार्थी अच्छी तरह और ज्यादा पढ़ाई कर सकते हैं उनकी याद रखने की शक्ति बढ़ती है यह विद्या (विधि) सभी के लिए अत्यंत लाभकारी है।

इस कार्य में अनेक लोगों ने सहयोग दिया जिसमें मुख्य रूप से माननीय कपिल मिश्रा, कानून मंत्री दिल्ली सरकार एवं डाॅ. अन्नपूर्ण मिश्रा, निगम पार्षद एवं पूर्व मेयर, शिक्षा अधिकारियों में विमलेश कुमारी, डिप्टी डारेक्टर उत्तर पूर्वी जिला ने भी इस महत्व पूर्ण कार्य के लिए विशेष सहयोग प्रदान किया और इस कार्य के लिए रतिराम वाटिका के मालिक चै. हेम सिंह ने अपने वाटिका को तीन दिन के लिए निःशुल्क प्रदान किया। स्व. मेघ सिंह मास्टर ने टेन्ट मुफ्त देकर विशेष सहयोग दिया।

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