कर की दरों में थोड़ा बदलाव कर सकती है सरकारः चिदंबरम

नई दिल्ली। सरकार ने आज संकेत दिया कि वह अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये अंतरिम बजट में उत्पादन शुल्क व सेवाकर की दरों में थोड़ा बहुत बदलाव कर सकती है लेकिन वह सुधारों को आगे बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने का प्रयास राजनीतिक आम सहमति के अभाव में शायद न करे।

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद सत्र शुरू होने की पूर्व संध्या पर आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लेखानुदान बजट लोकसभा में 17 फरवरी को पेश किया जायेगा। उन्होंने कहा कि उनका भाषण 12 से 18 पृष्ट का छोटा भाषण होगा। वह चाहेंगे कि सदन में इस पर चर्चा हो।

वर्ष 2004 में तत्कालीन वित्त मंत्री जसवंत सिंह ने 12 पृष्ट का भाषण दिया था। इसके बाद 2009 में मुखर्जी ने 18 पन्नों का भाषण पढ़ा था। मेरे पास अपने बजट भाषण के लिये दो संख्याओं का विकल्प है। हम किसी भी कानून में संशोधन को छोड़ कोई भी प्रस्ताव कर सकते हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, हम आयकर अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम या उत्पाद शुल्क अधिनिमय में संशोधन का प्रस्ताव नहीं कर सकते। पर ऐसा प्रस्ताव किया जा सकता है जिसमें कानून के संशोधन की बात न हो। हम भविष्य की रपरेखा भी प्रस्तुत कर सकते हैं। चिदंबरम ने एक सवाल के जवाब में कहा, उत्पाद शुल्क और सेवाकर दरों में जो भी बदलाव करने की जरूरत है उन्हें कानून में संशोधन किये बिना किया जा रहा है और किया जायेगा। उन्होंने कहा, पिछले सप्ताह हमने कुछ बदलाव किये हैं। इस सरकार का कार्यकाल जब तक रहेगा तब तक ऐसे बदलाव जारी रहेंगे जिनके लिए जहां संसद में संशोधन पेश करने अथवा संसद की अनुमति की जरूरत नहीं होगी। ऐसे बदलावों को हमें अधिसूचित कर अधिसूचना को संसद में रखना होगा। बीमा विधेयक के बारे में चिदंबरम ने कहा कि संसद के 5 फरवरी से शुरू होने वाले इस सत्र में इस पर चर्चा नहीं हो सकेगी। यह सत्र मौजूदा लोकसभा का अंतिम सत्र होगा। इस विधेयक में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सीमा को 26 से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

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