मध्यप्रदेश में किसानों को बर्बाद कर रही बारिश, सोयाबीन, मूंग सहित सभी फसलें बर्बाद

भोपाल/नगर संवाददाता : मध्य प्रदेश में सितंबर के महीने में भारी बारिश के चलते 32 से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में प्रदेश के 18 जिलों में बारिश को लेकर रेड अलर्ट और 20 जिलों में ऑरेज अलर्ट जारी किया है। सूबे में अधिकांश भागों में हो रही भारी बारिश के चलते जहां आम जनजीवन बेहाल है वहीं मूसलाधार बारिश ने किसानों को बड़ी मुसीबत में डाल दिया है।
बर्बाद हो रही सभी फसलें:
मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड बारिश के चलते खेतों में पानी भरने से खड़ी फसलें बर्बाद या बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है। मध्य प्रदेश वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर साधुराम शर्मा ने वेबदुनिया से बातचीत में बताया कि इस वक्त प्रदेश में जिस तरह लगातार बारिश हो रही है उससे किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। किसान अपनी फसल बचाने के लिए अब भगवान से प्रार्थना कर रहे है।

कृषि एक्सपर्ट डॉ. शर्मा कहते हैं कि बारिश से खेतों में पानी भरने से सबसे अधिक नुकसान सोयाबीन का फसल को हुआ है। सोयाबीन के फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है और जो बची है उसमें कीड़े लगने का खतरा पैदा हो गया है। वह कहते हैं कि खेतों में पानी भरे होने से जमीन के पोषक तत्व सोयाबीन का पौधा ले नहीं पा रहा है और न ही प्रकाश संश्लेषण की क्रिया हो रही है जिससे पौधों की ग्रोथ रुक गई है और अब फसलों पर कीड़ों के लगने का खतरा हो गया है। साधुराम शर्मा कहते हैं कि सोयाबीन फसल वहां बहुत खराब हो गई है जहां पानी लगातार भरा हुआ था।
डॉक्टर साधुराम शर्मा कहते हैं कि बारिश से सबसे कम नुकसान अब तक गन्ने की फसल को हुआ है लेकिन जमीन गीली होने से अब गन्ने की फसल के गिरने का खतरा पैदा हो गया है। वह निमाड़, नरसिंहपुर और बैतूल जैसे इलाकों में जहां गन्ने की पैदावार ज्यादा होती वहां किसानों को अब गन्ने की फसल बचाने के लिए अतिरिक्त सर्तकता बरतने के निर्देश देते है।

इसके साथ जो बारिश से धान की फसल के अमृत मानी जाती है उस पर भी अब खतरा मंडराने लगा है। कृषि एक्सपर्ट कहते हैं कि अबतक धान की फसल कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है लेकिन अब अगर और पानी बरसा तो धान की फसल भी कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ जाएगी।

बर्बाद हो गई सब्जियां: कृषि एक्सपर्ट साधुराम शर्मा कहते हैं कि इस मूसलाधार बारिश का तत्काल असर सब्जियों पर देखने को मिला है। वह कहते हैं कि सब्जियां बहुत नाजुक होती है और बारिश के चलते उनके फल गिर जाते है। इसके साथ ही खेतों में पानी भरने से उनके सड़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। इसलिए सब्जी जोकि किसानों के लिए नगदी फसल मानी जाती है उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
किसानों को सलाहः
कृषि विशेषज्ञ डॉक्टर साधुराम शर्मा वेबदुनिया के जरिए किसानों को सलाह देते हैं कि वह अपने खेतों में भरे पानी को निकालने की कोशिश करें और जैसे ही बारिश खत्म हो उसके बाद फसलों पर पेस्टीसाइड और यूरिया का छिड़काव करें जिससे फसल कीड़ों और बीमारियों से बच जाएगी।

सरकार भी सक्रियः
मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव ने किसानों को भरोसा दिलया है कि इस संकट में सरकार उनके साथ खड़ी हुई है। वह कहते हैं कि सरकार की प्राथमिकता में किसान सबसे उपर है कि सरकार किसानों को हरसंभव मदद देगी। इसके साथ ही सरकार ने अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों का सर्वे कराने के निर्देश अफसरों को दिए है।

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