रेलवे प्रशासन में लापरवाही की वजह से 6 महीने के बच्चों की मौत

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गोण्डा/उत्तरप्रदेश, रणवीर कुमारः रेलवे प्रशासन चाहे लाख दावा करे लेकिन हकीकत कुछ और बयां कर रही हैं। घर से कोई इसी आस के साथ निकलता है कि हम एक मंजिल से दूसरे मंजिल तक शुभ शुभ पहुंच जाएं। लेकिन रेलवे यात्रा के दौरान 6 महीने के बच्चे ने मां के गोद में दम तोड़ा। प्राप्त जानकारी अनुसार सुभाष झा और ज्योति झा सीतामढ़ी के कोदरिया गांव के रहने वाले 6 जून को ट्रेन संख्या 04403 बरौनी नई दिल्ली स्पेशल ट्रेन मुजफ्फर पुर 4ः15 सुबह जो की 5 घंटे देरी से आयी। सब खुशी-खुशी चल पड़े अपनी मंजिल की ओर 11 घंटे बाद अचानक एक 6 महीने के बच्चे को बुखार से तबियत खराब हो गयी। बुखार की दवाई नहीं होने की वजह से उन्होंने अपने रिश्तेदार को फोन करके दवाई मंगवाया और बच्चे को दिया ।उसके बाद बच्चा बेहोश होने लगा उसकी मां रोने लगी फिर और अन्य साथ में बैठे यात्रा कर रहे लोग ने इस सम्बंधित शिकायत रेलवे टोल फ्री 182 में जानकारी दी गयी। जिसमे बताया गया बच्चे को आॅक्सीजन की जरुरत हैं। मगर उन्होंने कहा पीएनआर नंबर दीजिये 6229836502 उन्होंने कहा ठीक आपको सहायता मिलेगी। फिर रेलवे की ओर से फोन आया की बस्ती जक्शन निकल गया। आपको गोण्डा रेलवे स्टेशन में आपको सहायता मिलेगी। हालांकि दोनों स्टेशन के बीच की दुरी 60 किलोमीटर के आस पास इस दौरान टीटी अधिकारी से संपर्क किया गया। इस परिस्थिति में ट्रेन में डाॅक्टर मौजूद रहते है तो उनका जबाब आया नहीं। गोण्डा रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद न वहा एम्बुलैंस सेवा एन कोई डाॅक्टर की सुविधा मिली और कागजी कार्यवाही में समय लगा दिया गया। फिर वो बाहर से हाॅस्पिटल गए। बाद में पीड़ित लोगों से जानकारी ली गयी बच्चे कैसे है तो जबाब सुनकर दुखी हुआ बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं। रेलवे प्रशासन की बहुत बड़ी लापरवाही ट्रेन में एक ऐसा डाॅक्टर होना चाहिए था। गोण्डा रेलवे स्टेशन आने में 40 मिनट लगा तब तक एक अच्छा डाॅक्टर और न ही एक एम्बुलैंस उपलब्ध करा सका।

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