गुजरात में किसानों पर लाठीचार्ज, सीएम रूपाणी ने दिए मामले की जांच के आदेश

भावनगर, हार्दिक हरसौरा : गुजरात में सौराष्ट्र के महुवा में एक बार फिर किसानों ने सरकार व सीमेंट कंपनी के खिलाफ आंदोलन किया। उग्र भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया तथा आंसूगैस के गोले छोड़े। कांग्रेस ने सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगया है। उधर, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। जानें, क्या है मामला…भावनगर की तलाजा व महुवा तहसील के डेढ दर्जन गांव की जमीन अल्ट्राटेक कंपनी ने दस साल पहले खरीद ली थी। कंपनी ने हाल ही में जिला कलेक्टर से माइनिंग की मंजूरी लेकर लाइम स्टोन की माइनिंग शुरू की तो किसानों ने पर्यावरण व जमीन पर प्रतिकूल असर पड़ने का मुद्दा उठाते हुए कंपनी के माइनिंग पर रोक की मांग की। बुधवार को किसान एकत्र हुए और कंपनी का घेराव करने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। कांग्रेस विधायक ललित कगथरा का कहना है कि पुलिस ने किसानों पर बर्बरता पूर्ण तरीके से लाठीचार्ज किया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े। राज्य सरकार किसान विरोधी है तथा उद्यमियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों पर अत्याचार कर रही है। कांग्रेस विधायक ने कहा कि कांग्रेस गुजरात विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएगी। उधर, किसान नेता बलवंत सिंह पढेरिया का कहना है कि लाइम स्टोन के लालच में कंपनी किसानों के स्वास्थ्य व खेती लायक जमीन के साथ खिलवाड़ कर रही है। पांच साल जमीन का उपयोग नहीं करने पर राज्य सरकार को जमीन अपने कब्जे में लेकर किसानों को सौंप देना चाहिए था। उनका कहना है कि 98 फीसद जमीन खेती योग्य है, इसलिए अल्ट्राटेक कंपनी के लाइन स्टोन खनन के काम पर रोक लगाकर जमीन वापस किसानों को दी जानी चाहिए। भाजपा का कहना है कि किसान दस साल पहले जमीन बेच चुके हैं। कलक्टर की मंजूरी से ही कंपनी ने खनन का काम शुरू किया है। इसके बावजूद किसानों के हित में सरकार जो आवश्यक होगा, कदम उठाएगी। घटना की जांच के आदेश..किसानों पर लाठीचार्ज व आंसू गैस छोड़ने की घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने मामले की गंभीरता व किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए इसकी रिपोर्ट मांगी तथा घटना की जांच के आदेश दिए। उधर, कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावडा ने कहा है कि राज्य सरकार किसान विरोधी है। किसानों के साथ आतंकियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। कांग्रेस पुलिस की इस दमनात्मक कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करती है। गौरतलब है कि महुवा में ही निरमा कंपनी के सीमेंट प्लांट को किसानों के विरोध के बाद बंद कर देना पड़ा था। भाजपा के ही तत्कालीन विधायक डॉ कनुभाई कलसरिया इस आंदोलन के अगवा बने थे।

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