खड़ी मशीनों से उठता प्रदूषण हवा को बना रहा है जहरीला !

मुंबई, नजीर मुलाणी : जैसा कि आप सभी जानते है कि वसई विरार शहर की आबादी में प्रतिदिन बढ़ोतरी होती जा रही है। बढ़ती आबादी के कारण ही जंगल हो रहे है तबाह वसई-विरार शहर बन रहा है कॉन्क्रीट का जंगल…जल्द ही इस समस्या पर ध्यान न दिया गया तो आनेवाले कल में साँस लेने के लिए हवाओ को भी बंद बोतल में खरीदना पड़ सकता है। एक समय ऐसा था कि जब शुद्ध हवाओ में सास लेना व प्राकृतिक नजारा मनमोह लेता था किन्तु आज के तौर में जहां देखो वहां कॉन्क्रीट के जंगल बनते जा रहे है। हम इंसान ही प्रकृति से खेल-खेलकर प्रकृतिक को जख्म दे रहे है। इतना समझने के लिए काफी है कि हम आज किस मुद्दे पर बात करेंगे। वसई-विरार शहर के हर क्षेत्र में जहा आपकी नजर जाएगी हर जगह कॉन्क्रीट के जंगल ही दिखाई देते है। पहाड़ो को काट-काट कर जंगलो को नष्ट किया जा रहा है। इंसान अपने निजी स्वार्थ के लिए जंगलो को खत्म करता जा रहा है। मौजूदा परिस्थिति में ऐसे कई खदान (खड़ी मशीन) आपको मिल जाएंगे जिसको चलाने की इजाजत स्थानिक प्रशासन द्वारा दी ही नही गयी है, फिर भी बिना रोक टोक ये धड़ल्ले से महसूल कर चोरी करते हुए चलाये जा रहे है। खड़ी मशीन जब चलती है तो हवाओ में छोटे-छोटे महीन पत्थरो के कड़ हवा में खुल जाते है जिससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचती है और किसी भी जीव को सास लेना दुर्लभ हो जाता है, इस कारणवश सास की बीमारियों में लगातार बढ़ोतरी भी देखी जा रही है। शहर में कई खड़ी मशीन तो रिहायशी इलाकों से चंद मिनटों की दूरी पर ही है। जब खड़ी मशीन चलती है तो धूल का गुबार आसमान को भी ढक लेता है। पर्यावरण को क्षति सिर्फ ये खड़ी मशीनें ही नही बल्कि इंडस्ट्रियल कंपनियों से निकलता धुंआ, चिमनियों से निकलता धुंआ इत्यादि कारण है। ठंड की शुरुवात हो रही है आप सुबह अपने घर के बाहर देखेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि हम प्रकृति को क्या दे रहे है…आपको घर के बाहर सिर्फ और सिर्फ दूर-दूर तक दमघोटु धूल का गुबार ही दिखता है।

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