अर्बन नक्सलियों की पहुंच न्यायपालिका में किस कदर है

राजकोट, हार्दिक हरसौरा : इन अर्बन नक्सलियों की पहुंच न्यायपालिका में किस कदर है यह जानने के लिए आपको कभी तीस्ता सीतलवाड़ के राइट हैंड रहे रईस खान के बयान को पढ़ना चाहिए तीस्ता सीतलवाड़ ने गुलबर्गा सोसाइटी को पुनर्वास करने के नाम पर एक एनजीओ सबरंग ट्रस्ट बनाया और रईस खान उस ट्रस्ट के ट्रस्टी भी था और तीस्ता सीतलवाड़ का गुजरात का प्रभारी था … खुद रईस खान के परिवार के 2 सदस्य और रईस खान का पूरा घर जलकर भस्म हो गया था …तीस्ता सीतलवाड़ और रईस खान सऊदी अरब कतर दुबई यमन इराक लीबिया जैसे 30 मुस्लिम कंट्रीज में गुजरात दंगों की सीडी दिखाकर करोड़ो डॉलर गुलबर्गा सोसाइटी के नाम पर वसूले बाद में तीस्ता सीतलवाड़ उन पैसों को अपने निजी खर्च दुबई में खरीदारी और शराब पीने में करने लगी तो रईस खान से उसका विवाद हो गया गुजरात पुलिस को दिए बयान में रईस खान ने बताया कि तीस्ता सीतलवाड़ की न्यायपालिका में इस कदर पहुंच है की वो सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों जिसमें जस्टिस आफताब आलम प्रमुख है और जो गुजरात हाईकोर्ट के जज थे फिर बाद में सुप्रीम कोर्ट के जज बने उनसे फोन पर घण्टों केस के बारे में डिस्कस करती थी जस्टिस आफताब आलम उसे कहते थे कि तुम याचिका डालो और मैं रजिस्टर को बोल दूंगा कि वह याचिका सीधे मेरे ही बेंच में आएगी और याचिका दायर करने के पहले ही इसका क्या निर्णय होना चाहिए उनसे बता देती थी कि आपको इसमें क्या फैसला देना है बाद में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एमबी शाह ने जस्टिस आफताब आलम के 40 फैसलों की 3000 पन्नों में विस्तृत विवेचना करके सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा था और कहा था कि जस्टिस आफताब आलम सीधे-सीधे न्यायपालिका का गला घोट रहे हैं और वह जज कम और एक मुस्लिम मौलवी ज्यादा नजर आ रहे हैं हालांकि मामला तूल पकड़ा फिर उन्हें जस्टिस आफताब आलम को गुजरात दंगों की सुनवाई से अलग कर दिया गया ।

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