सरकार बेखबर प्रवासी कर रहे मौत का सफर

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मुंबई, अजबाराम चौधरी : स्कूल की छुट्टियों और शादियों की सीजन के चलते आजकल राजस्थान की ओर जाने वाली रेलगाडिय़ों में जबरदस्त भीड़ है। लोगों को मन मुताबिक टिकट नहीं मिल रहीं हैं। लिहाजा प्राइवेट ट्रावेल्स संचालकों की मनमानी भी सिर चढ़कर बोल रही है। इन तमाम परिस्थितियों के बीच दादर-बीकानेर रेल को नियमित करने की बेहद पुरानी मांग भी ठंडे बस्ते में दम तोड़ती दिख रही है। नतीजन, प्रवासीजनों को आए दिन मुसीबतों से दो-चार होना पड़ रहा है और मुंह मांगे दाम पर बसों में जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है। यूं तो देश में चहुं ओर विकास के दावे किए जा रहे हैं, परंतु मुंबई से राजस्थान जाने वाले प्रवासियों को अपनी जन्मभूमि तक जाने के लिए काफी शारीरिक एवं आर्थिक तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे एवं रेल मंत्रालय को लगातार अवगत कराए जाते रहने के बावजूद दादर-बीकानेर ट्रेन को नियमित नहीं किए जाने का हर्जाना प्रवासी राजस्थानी प्राइवेट ट्रावेल्स संचालकों को 300 रुपए की टिकट के लिए 1000 रुपए से चार हजार रुपए तक का भुगतान करके चुका रहे हैं। यात्रियों द्वारा एक टिकट के चार गुना से भी अधिक कीमत चुकाने के बाद भी बसों में सुकून से सीट मिलना तो दूर बल्कि उन्हें भेड़-बकरियों की तरह ठूंसा जाता है। स्थिति तब और भी भयावह दिखाई देती है, जब बसों के अंदर जगह नहीं होने पर यात्रियों को बसों की छतों पर बैठकर यात्रा करनी पड़ रही है। ऐसे में यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। यह स्थिति कोई नई नहीं है बल्कि ऐसे हालातों का सामना प्रवासी राजस्थानियों को हर साल करना पड़ता है। प्रवासियों को इस पीड़ा से राहत दिलाने के लिए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा एवं मुंबई कांग्रेस राजस्थान सेल के अध्यक्ष हीरा देवासी काफी समय से रेलवे एवं रेल मंत्रालय से दादर-बीकानेर ट्रेन को नियमित करने की मांग करते आ रहे हैं। परंतु आज तक इस मांग पर अमल नहीं किया गया। कुछ भी कहें लेकिन राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी और प्राइवेट ट्रावेल्स संचालकों की मनमानी का शिकार तो आम प्रवासी को ही बनना पड़ रहा है। राजस्थानी प्रवासियों के लिए सही कीमत देकर रेल में सुकून की यात्रा करना आज भी दूर की कौड़ी ही नजर आ रहा है। जालोर के सांसद देवजी पटेल ने 2014 में आम चुनाव के दौरान दादर-बीकानेर को नियमित करने का आश्वासन दिया था। वह अभी तक महज आश्वासन ही साबित होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने प्रवासियों की पीड़ा दूर करने की दिशा में कोई समाधान नहीं किया है। हमने जो ज्ञापन रेलवे एवं रेल मंत्रालय को भेजा था, वो अभी भी कहीं धूल फांक रहे हैं और हमारे प्रवासीजन तकलीफ झेल रहे हैं।

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