आज का दिवस है कुछ खास

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दिल्ली, राहुल मालपानी : 13अप्रैल, वैसाखी, गुरू ग्रंथ साहिब स्थापना दिवस, पवित्र नदी गंगा का अवतरण! जलियांवाला कांड, किसी एक से भी कुछ सीख लो! सिंह बन 13 अप्रैल, वैसाखी, गुरू ग्रंथ साहिब स्थापना दिवस, पवित्र नदी गंगा का अवतरण! जलियांवाला कांड, किसी एक से भी कुछ सीख लो! सिंह बन जाओ, गंगा में पवित्र हो जाओ,पर तुम तो हर रोज जलियांवाला कांड कर रहे हो, कभी घोटाले, कभी बलात्कार, कभी बंद तो कभी धरना! बस करो! बस करो!****************13 अप्रैल,1699 को श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर में दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना कर अत्याचार को समाप्त किया। उन्होंने सभी जातियों के लोगों को एक ही अमृत पात्र (बाटे) से अमृत छका पाँच प्यारे सजाए। ये पाँच प्यारे किसी एक जाति या स्थान के नहीं थे, वरन्‌ अलग-अलग जाति, कुल व स्थानों के थे, जिन्हें खंडे बाटे का अमृत छकाकर इनके नाम के साथ सिंह शब्द लगा।
ज्ञानी, ध्यानी, गुरु, त्यागी या संन्यासी होने का अहंकार कहीं ज्यादा प्रबल हो जाता है। यह बात गुरु गोविंद सिंह जी जानते थे। इसलिए उन्होंने न केवल अपने गुरुत्व को त्याग गुरु गद्दी गुरुग्रंथ साहिब को सौंपी बल्कि व्यक्ति पूजा ही निषिद्ध कर दी। वैशाखी पंर्व है खालसा पंथ का जन्म दिवस! दिन वैशाखी जलियाँ वाला बागदर्दीला कांड! वैशाखी पर्व फसल की कटाई कृषि उत्सव मनाओ, गंगा में पवित्र हो जाओ,पर तुम तो हर रोज जलियांवाला कांड कर रहे हो, कभी घोटाले, कभी बलात्कार, कभी बंद तो कभी धरना! बस करो! बस करो!****************13 अप्रैल,1699 को श्री केसगढ़ साहिब आनंदपुर में दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना कर अत्याचार को समाप्त किया। उन्होंने सभी जातियों के लोगों को एक ही अमृत पात्र (बाटे) से अमृत छका पाँच प्यारे सजाए। ये पाँच प्यारे किसी एक जाति या स्थान के नहीं थे, वरन्‌ अलग-अलग जाति, कुल व स्थानों के थे, जिन्हें खंडे बाटे का अमृत छकाकर इनके नाम के साथ सिंह शब्द लगा। ज्ञानी, ध्यानी, गुरु, त्यागी या संन्यासी होने का अहंकार कहीं ज्यादा प्रबल हो जाता है। यह बात गुरु गोविंदसिंहजी जानते थे। इसलिए उन्होंने न केवल अपने गुरुत्व को त्याग गुरु गद्दी गुरुग्रंथ साहिब को सौंपी बल्कि व्यक्ति पूजा ही निषिद्ध कर दी।****************वैशाखी पर्वहै खालसा पंथ काजन्म दिवस !’ सिंह′ नामक वैशाखी पर्व पर मिली उपाधि! दिन वैशाखी जलियाँ वाला बागदर्दीला कांड !वैशाखी पर्व फसल की कटाई कृषि उत्सव !

 

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