वसई-विरार महानगर पालिका के लिपिक अधिकारी बाळाराम सालवी , (आय विभाग) के भ्रष्टाचार का पर्दाफास होने लगा तो पत्रकारो पें गुन्हा दाखिल किया

रिपोर्टर -नजीर मुलाणी ,-मुंबई  महाराष्ट्र आयुक्त ने कारवाई करने के दिए आदेश उस समय पत्रकार ने पूछा कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे, उनको रिकॉर्डिंग वीडियो दिखाया, सहआयुक्त रितेश किनी ने बालाराम सालवी को आदेश दिया यह सब क्या है, यह सवाल पत्रकार ने पूछा, हम लोगों ने RTi पेपर डालकर पेपर निकाला उसके बाद भी आप लोगों ने होली बाजार ,st डिपो खाऊ गल्ली, हात गाड़ी ,प्राइवेट आदमी हप्ता वसुल करता है, नगरपालिका के अधिकारी पैसा वसूल नहीं कर रहा हैं ,प्राइवेट आदमी वसूल कर रहा है,यह पत्रकारों ने सालवी और (रितेश किणी सह आयुक्त) को बताया तब सालवी साहब को वीडियो ,रिकॉर्डिंग दिखाया तब यह क्या है ,भ्रष्टाचार है ,या नहीं यह सब नजर आने लगा ,तब उनके दिल की धड़कन बढ़ने लगी उस समय हम सब कॉबीन से बाहर थे, धड़कन बढणे से उनको सरकारी दवाखाना में भर्ती करवाया उनका bp हाई हुआ यह महानगरपालिके में पहले भी ऐसे हादसे सो चुके है इसमें महानगर पालिका के अधिकारी बाहर के लोगों को फोन कर ,कर बोल देते हैं ,और ऐसे हत्से हुए एक RTi कार्यकर्ता को मारा हैं ,उसके बाद एक लेडीस उसका कंपाउंड महानगर पालीका ने तोड़क कारवाई की किसी के कहने पर इस लेडीज़ ने महानगर पालिका के अंदर अपने आप को जलाने की कोशिश भी की इस महानगर पालिका में कॉमेरे लगे हुए है लेकिन अब तक कुछ भी खुलासा नहीं हो पाया ,चालू है ,या बंद है, यह सब बस भ्रष्टाचार का भांडा फोड़ सामने नजर आने लगा तो अधिकारी अपनी पिक्चर जैसी एक्टिंग करके दवाखाने में भर्ती हो कर एक्टिंग करने का हिरो बनकर , झूठ का सहारा लेकर 3 पत्रकारों पर गुन्हा दाखल कर, कर हीरो बन गया ,ऐसे अधिकारी बचने का तरीका धुंडते है,पत्रकारों के ,सामने यही सरकारी अधिकारी ऐसी झूठे इल्जाम लगाकर पुलिस वाले ही बिना पूछे गुन्हा. दाखल कैसे करते है,ऑफिसर भ्रष्टाचार करने के बाद भी उनके उपर गुन्हा दाखल नही किया जाता, उनकी हिम्मत नहीं होती ऐसा लगता है यह सब मिली जुली भगत है ,पत्रकार एक समाज का आईना होता है, लेकिन यह जानते हुए भी ,अपनी झुठी गवाह देकर ,फसाने का अच्छा तरह से काम करते है, आम जनता का तो बात और है, जब पत्रकार पर झूठे इल्जाम लगाकर गुन्हा दाखल करते हैं,तो लोगोंको कहां से अपना हक मिल सकता है ,यह कानून यह अन्याय सचमुच यह समजमें नहीं आता इस वजह से आदमी मर जाना,या सुसाइट करना बेहतर समझता है,या खामोश रहना सरकारी लोगों के ऊपर उंगली उठाए ,तो यही हाल होगा , गुन्हा दाखल होगा ,जेल में जाना पड़ेगा इस डर के मारे महानगरपालिका के अधिकारी खुलेआम भ्रष्टाचार और पैसा कमा रहे ,हमारे विरोध में कुछ बताएं तो कानून हमारे साथ है ,लेकिन बस भ्रष्टाचार हटाओ नारा लगा कर यही लोग बताते है ,और यही लोक काम कर रहे है, आम जनता क्या करेगी यह सोचकर महानगर पालिका के अवैध बाजार की वसुली कर ,कर महानगर पालीका को चुना लगाकर अधिकारी अपना जेब गरम करते है, प्राइवेट आदमी लगाकर,15 रू, 20 रु, की पावती होती है ,महानगरपालीके की ,वोभी नही दिए जाती है, दादागिरी से 100रू, 120 रू,150रु, वसूल किया जाता है ,नहीं देने पर मार्केट में जो भी चीजें उसको उठा लेते है,लोगों का नुकसान कर कर उनसे उनको यह सब सहना पड़ता है ,अपने पेट के लिए इसे हात जोड़कर हमें धंधा करने दो, हम इतना पैसा देने को राजी है, हमको लाचार बना देते हैं ,यह भ्रष्टाचार को बंद करने के लिए तीन पत्रकारों ने अधिकारी को पूछा यह सब क्या है,इतना दिखाकर गुनाह दाखिल क्यों नहीं हो रहा है बालाराम सालवी ने यह झूठा बयान देकर पत्रकारों ने गाली और मारपीट किया बताकर आप गुन्हा दाखिल करो, फायर fir दर्ज किया, पत्रकार सच का सामना करता है, अधिकारी का पर्दाफास होने वाला है मालूम हो गया ,मै झ्समें से बचना ना मुन्किन है,टेंशन लेकर हॉस्पिटल में एडमिट हुआ, महानगर पालिका में कैमरा होते हुए भी, किसी को उसकी जानकारी नही दी जाती है , यह सब अपना कारोबार पता ना चले ,सभी को गुजारीस है, महानगर पालिका से सावधान होकर ,अपना पेपर जो भी काम करना सावधान रहना जरुरी है ,आज पत्रकारों पर हुआ है कल आप लोगों के साथ भी हो सकता है ,एसे अधिकारों से बच के रहना है, झूठे इल्जाम लगाकर गुना दाखल किया गया जाएगा पत्रकारों पे, उसी दिन पोलीस स्टेशन में अर्जी लिखकर दिया, उसके ऊपर कोई ऑब्जेक्शन नहीं लिया, भ्रष्टाचार करने वाले को न्याय मिलता है ,जो सच का सामना करें उसके उपर गुन्हा दाखल होता है,अधिकारी कर्मचारी ने किया आयुक्त के अधिकारीयो ने आदेश का उल्लंघन कर कर अपना नया कानून बनाया, आयुक्त का आदेश को अपने दादागिरी से खरीद किया ,पुलिस वाले को हाथों में लेकर झुठा गुना दाखल करवा दिया यह आदमी कुछ भी कर सकता है ,यह साबित कर दिया यह अधिकारी बालाराम सालवी लिपीक, ऐसे अधिकारियों का पर्दाफास करने का पत्रकारों ने मांग की है पूरे फ्रुप के साथ तब भी कानून कारवाई नहीं हो रही है इसी के अंदर पोलीस और अधिकारी मिली जूली है ,पत्रकारों पर गुना दाखल करके अपना भांडा फोड भ्रष्टाचार ना निकले इसलिए तुरंत FiR दर्ज कि जाती है,पत्रकार आगे ना बडे यह सब पोलीस और महानगरपालीका के अधीकारी मिलकर काम करते है,वसई में पारनाका बिट आप नोट दो, हम अजादी देंगे ,आप भी चुप हम भी चुप ,यह सब चलता है ,या के Pi साहब को भी पता नही चलता है,क्या हो रहा है,सह आयुक्त रितेश किणी कारवाई करणे बोले तो मुझे गल्ली बोळी मालुम नही आयसा जवाब देता है,एसे अधिकारीयो को क्यु पोस रहे हो, भ्रष्ट्राचार मुफ्त करो ,के बदले भ्रष्ट्राचार बढाओ यह सिलसिला जारी है, उसपर ऑपजेक्सन लिया,
तो गुन्हा दाखिल होता है,यही सब होता है,उस पर आयुक्त ने अधिकारीयो पर इनकॉयरी बिटाणी चाहिए ,वसई पारनाका बिट पर भी इनकॉयरी लगाना चाहिए,तब भ्रष्ट्राचार खतम हो सकता है,भ्रष्ट्राचार अधिकारो पर सस्प्रेड करणा जरूरी है,तब भ्रष्ट्राचार खतम होगा ,यह मांग पत्रकारो की है,

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