29 बार सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्या ज्यों की त्यों

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पलवल, हरियाणा/गुलाब सिंह होडलः हरियाणा प्रदेश में सरकार द्वारा जनता की समस्याओ के निदान के लिए शुरू की गई।  सीएम विंडो से भी कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। लोगों द्वारा सीएम विंडो पर की गई। शिकायत के कई कई महीने बीतने के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। जिसके कारण जनता का सीएम विंडो से विश्वास उठता जा रहा है। उप मण्डल के गांव बोराका डाडका माईनर में पिछले काफी समय से पानी न आने के मामले को लेकर सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई गई लेकिन विडंबना यह है कि सीएम विंडो पर 29 बार शिकायत भेजने के बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका है जिसके कारण किसानों में रोष व्याप्त है। होडल के बक्सुआ पट्टी निवासी मुकेश कुमार खजान पहलवान किशन सिंह पी टी आई ने बताया कि बोराका डाडका माईनर में पिछले काफी समय से सिंचाई के लिए पानी न आने के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उक्त माईनर से क्षेत्र के दर्जनों गांवों के किसान सिंचाई के लिए पानी का इस्तेमाल करते थे लेकिन माईनर में 35 वर्ष से बूंद भी पानी नहीं आया है और जमीनी पानी खारा होने के कारण ग्रामीणो को नुक्सान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणो द्वारा जब विभागीय अधिकारियों से इस बारे में शिकायत की जाती है तो हरियाणा सिंचाई विभाग अपना पल्ला झाड़ कर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के ऊपर डाल देते हैं। यह हरियाणा सिंचाई विभाग की पूरी पूरी लापरवाही है उक्त माईनर में एक बूंद भी पानी की नहीं पहुंचती है। जिसके कारण क्षेत्र के किसानों में प्रशासन के प्रति रोष व्याप्त है। माईनर में पिछले काफी समय से पानी की आपूर्ति न होने के कारण यहां किसानों को ट्यूबैलो के खारी पानी का सहारा लेना पड़ता है। एक ओर इस माईनर में 35 वर्षो से पानी नहीं पहुंचा है लेकिन माईनर की साफ़ सफाई के नाम पर प्रति वर्ष लाखों रुपए सरकार द्वारा खर्च किए जा रहे हैं मुकेश कुमार का कहना है कि इस मामले में हम ग्रामीण वासी 29 बार सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज करा चुके हैं लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। उन्होंने बताया कि लगभग 35 वर्ष पहले गांव सोन्दहद बोराका, डाडका, लोहिना, गढ़ी पट्टी, होडल आदि के जंगल में हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई होती थी लेकिन अब 35 वर्षो से उक्त माईनर में बंद भी पानी नहीं आया है जिसके कारण किसानों के पास कृषि के लिए जमीन उपलब्ध होने के बावजूद किसान कर्ज तले दबता जा रहा है।

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