संसाधनों की कमी से जूझ रहा यातायात व परिवहन विभाग

जौनपुर, उत्तर प्रदेश/नगर संवाददाताः यातायात पुलिस व परिवहन विभाग यातायात के नियमों का पालन कराने की दिशा में कोई कारगर पहल नहीं कर पा रहे हैं। विभाग के पास सुरक्षित यातायात से संबंधित नियम और कानून की लंबी फेहरिस्त है लेकिन परिवहन विभाग उसे अमली जामा पहनाने में अक्सर असफल ही साबित हुआ है। विभाग संसाधन और इच्छाशक्ति के अभाव से पूरा जूझ रहा है। यातायात पुलिस के पास जहां मैनपावर की कमी है तो वहीं पर सुगम यातायात की कमान होमगार्डों को सौंप दी गई है। यातायात पुलिस को जहां आवागमन सुचारु रूप से चलाने के लिए 50 होमगार्ड की आवश्यकता है उसके सापेक्ष मात्र 20 ही हैं। वह भी चुनाव के समय छीन लिए जाते हैं। स्थायी तौर पर ट्रैफिक विभाग में एक टीएसआई, पांच हेड कांस्टेबल, 11 सिपाही इनके पास मौजूद हैं। जिसमें अधिकतर पुलिस बल वीआईपी ड्यूटी, छुट्टी व किसी सरकारी कार्य से बाहर चले गए तो समस्या और बढ़ जाती है। शहर के अंदर इतने चौराहों को नियंत्रित कर पाना असंभव सा लगता है। ऐसे में नागरिक यातायात नियमों का जमकर उल्लंघन करते हैं जिससे रोजाना पूरा शहर जाम से जकड़ जाता है। इससे निजात पाने के लिए कोई अधिकारी व पुलिस के जिम्मेदार सुधि नहीं ले रहे हैं जिससे जाम की समस्या और बढ़ गई है। नगर की सड़कों को चौड़ीकरण के साथ ही एक साल पहले तक कई बार वन वे सिस्टम लागू किया गया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। जनपद के शाहगंज, मड़ियाहूं, मुंगराबादशाहपुर, मछलीशहर, रामपुर, गौराबादशाहपुर, बदलापुर आदि बाजारों में भी लोग जाम के झाम से अक्सर जूझते रहते हैं। यहां यातायात पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं है। अपनी मर्जी से चलाते हैं वाहन जिले में यातायात पुलिस नहीं होने के कारण चालक अपनी मनमर्जी से वाहन चलाते हैं। कोई दाएं चलते-चलते अचानक बाएं घूम जाता है, तो कोई बाएं चलते- चलते अचानक दाएं आ जाता है। इस वजह से कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। संसाधन के अभाव में यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों को देखकर पुलिस अनदेखी करती है। जिले में यातायात नियमों को ताक पर रख लोग वाहन चलाते हैं। जिला पुलिस व परिवहन विभाग की सख्ती के बाद कुछ दिन तक तो लोग हेलमेट, सीट बेल्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज साथ लेकर चलते हैं। कुछ दिन बाद ढाक के तीन पात वाली कहानी हो जाती है। जहां चाहा बना लिया पार्किग स्थल जिला मुख्यालय समेत अन्य नगर पालिका संग नगर पंचायतों में पार्किग के लिए अलग से कहीं स्थान चिह्नित नहीं है। ऐसे में वाहन चालक जहां-तहां वाहनों की पार्किंग कर देते हैं। ज्यादातर इलाकों में सड़क के किनारे वाहनों की पार्किंग होती है। इससे सड़क संकरी हो जाती है और इसी वजह से भी दुर्घटना घटती है। विशेषकर दो पहिया व चार पहिया वाहन चालक जहां-तहां अपने वाहन को खड़ा कर देते हैं। इस दिशा में भी प्रशासनिक पहल जरूरी है। यह है संसाधन -एक टीएसआई, चार हेड कास्टेबल, नौ सिपाही, एक जीप, प्रदूषण चे¨कग को गैस एनालाइजर डीजल व पेट्रोल, स्मोकमीटर, ¨टट मीटर काली फिल्म चेक करने को, स्पीड राडार, ब्रीथ इनलाइजर नशे में धुत चालकों की चे¨कग को, कोन, बैरियर आदि। जंग खा रहे हैं संसाधन : यातायात पुलिस के पास मौजूद संसाधनों का जमीनी हकीकत पर कभी कभार प्रयोग होता है। ऐसे में यह संसाधन रखकर जंग खा रहे हैं। सही से देखा जाए तो इन संसाधनों को एक साथ रखने के लिए एक एंटीसेप्टर वाहन होता है। यह मोबाइल गाड़ी की तरह चौराहों व शहर में चलता है। जिसको कहीं भी ले जाकर चेक कर सकते हैं। जनपद में इसकी व्यवस्था न होने से चे¨कग भी नाम मात्र की होती है। ड्राइ¨वग लाइसेंस बनाने को सुधरी प्रक्रिया : एआरटीओ कार्यालय में नए ड्राइ¨वग लाइसेंस में पहले की अपेक्षा काफी हद तक सुधार हुआ है। पहले बिना परीक्षा कराए लाइसेंस जारी कर दिया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाता। ऑनलाइन व्यवस्था होने से सारी प्रक्रिया के लिए आवेदनकर्ता को मौके पर मौजूद रहना पड़ता है। जिसमें अभ्यर्थी स्वयं फार्म भरेगा, फीस, बायोमीट्रिक में दोनों अंगूठे का निशान लगाया जाता है। इसके बाद मौके पर फोटो खींचा जाता है, डिजिटल हस्ताक्षर होता है। इसके बाद आनलाइन परीक्षा देना होता है। क्या कहते हैं जिम्मेदार :- एआरटीओ सौरभ कुमार ने बताया कि ड्राइ¨वग लाइसेंस बनाने में मानकों का पूरी तरह से ख्याल रखा जाता है। परीक्षा कराकर ही लाइसेंस जारी किया जाता है। यातायात नियमों का उल्लंघन न हो इसके लिए विभाग सतर्क है। लोगों को दुर्घटनाओं से बचने के लिए हेलमेट लगाने का निर्देश दिया जाता है। ओलवरलो¨डग न करने की हिदायत दी जाती है। पालन न करने वालों का चालान किया जाता है। टीएसआई विजय प्रताप ¨सह ने कहा कि पर्याप्त मैन पावर नहीं है। ऐसे में ट्रैफिक कंट्रोल में थोड़ी समस्या जरूर होती है बावजूद इसके कुशल संचालन का प्रयास किया जाता है।

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