दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र का उद्घाटन

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः ‘प्रौढ़शिक्षा’ अर्थात 21 वर्ष से अधिक आयु के प्रौढ़ों को शिक्षा देना है। प्रौढ़ शिक्षा का मुख्य उद्देश्य भारत के हर व्यक्ति को साक्षर बनाकर उसे पढ़ने-लिखने और अंकगणित का व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करना है। भारत में प्रौढ़ शिक्षा का शुभारंभ समाज सेवी संस्थाओं द्वारा मुम्बई में किया गया था। वर्तमान में गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के मंथन –’संपूर्ण विकास केन्द्र’ प्रकल्प के तहत ‘स्याही’ नामक प्रौढ़शिक्षा केन्द्र विविध स्थलों पर सफलता पूर्वक चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 12 नवम्बर को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सूर्य नगर पार्क में एक नूतन स्याही केन्द्र का अधिष्ठापन किया गया। इस उद्घाटन समारोह का शुभारंभ रिबनकर्तन द्वारा किया गया। तत्पश्चात्दीप – प्रज्ज्वलनव प्रार्थना की गई। तदनन्तर नूतन अधिष्ठापन के उपलक्ष्य में प्रौढ़ों को शिक्षा का संदेश देता हुआ असतो मा सद्गमय नामक नृत्य प्रस्तुति एवं नाटक का मंचन किया गया। इस कार्यक्रम में रोट रेक्टक्लब के औदार्य से 100 से अधिक प्रौढ़लाभन्वित हुए। उन्हें प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र के पहचान पत्र तथा अध्ययन सामग्री से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी दयाल नागपाल जी, व्यवसायी पप्पू नागपाल जी, प्रदीप ढींगरा तथा अमित भाटिया मौजूद थे। इन अतिथियों ने अपने प्रभावी भाषण द्वारा मंथन प्रकल्प के तहत स्याहीकार्यक्रम के नए विस्तार की शुभकामनादी व इस कार्य की सराहना भी की। साथ ही इस परियोजना के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान करता रोटरेक्टक्लब के 15 स्वयं सेवक भी मौजूद थे जिनका धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम के दौरान ही दिल्ली स्थित अन्य प्रौढ़शिक्षा केन्द्रों के विद्यार्थियों द्वारा परिसाक्ष्य भी सांझा किया गया जिसमें उन्होंने अपने रूपांतरण व विकास की यात्रा को बताया।

 

 

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