लोगों की जेब पर डाका डाल रही है सब्जियों की बढ़ती कीमत

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः राजधानी दिल्‍ली और उत्तर प्रदेश की राजधानी में एक बार फिर से सब्जियों के दामों में तेजी देखने को मिल रही है। टमाटर, आलू और प्याज समेत मटर और अन्य सब्जियों की कीमतों में करीब 30-40 रुपये तक की तेजी देखी गई है। वहीं कभी 40 रुपये में मिलने वाली गोभी 100 रुपये तक जा पहुंची है। लिहाजा ग्राहकों की जेब पर एक बार फिर से सब्जी लात मार रही है। दिल्‍ली-एनसीआर की ही यदि बात करें तो सब्जियों के दाम में तेजी मध्यम वर्ग को परेशान करने लगी है। टमाटर और प्याज के दाम में बढ़ोतरी तो रुलाने को आतुर है। कुछ ही दिनों में खुदरा बाजार में प्याज जहां 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है, वहीं टमाटर भी 80 रुपये प्रति किलो की दर को छूने लगा है। खरीदारों के मुताबिक सर्दियों में सब्जियों के दाम कम होते हैं, लेकिन इस वक्त इनके बढ़े दाम चौंकाने वाले हैं। हरी मटर 100 रुपये किलो तो गोभी 80 रुपये प्रति किलो तक में मिल रही है। यही हाल अन्य सब्जियों का भी है। थोक मंडी आजादपुर में भी सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी हुई है। आढ़तियों के मुताबिक दिल्ली में टमाटर दक्षिण के राज्यों से आ रहा है, जहां बारिश हो रही है। ऐसे में यह बढ़ोत्तरी आगे भी जारी रह सकती है। आजादपुर से सब्जियां दिल्ली के खुदरा मंडियों और कालोनियों तक में पहुंचती हैं। हालात यह है कि खुदरा बाजार तक पहुंचने में सब्जियों के दाम करीब दोगुने हो जाते हैं। जुलाई-अगस्त में भी खुदरा बाजार में टमाटर 100 रुपये प्रतिकिलो के पार चला गया था। टमाटर व प्याज की लगातार बढ़ रही कीमत के पीछे कारोबारियों द्वारा जमाखोरी को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का फैसला लिया है। सरकार ने दिल्ली में प्याज व टमाटर की स्थिति की समीक्षा की। इसकी जांच खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी करेंगे। इसके अलावा स्थानीय थाना अध्यक्ष को भी इन जांच टीमों के लिए सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। विभाग को आदेश दिए गए हैं कि वह प्रतिदिन के हिसाब से सब्जियों की आवक की रिपोर्ट तैयार करे और उसे सरकार को भेजे। दिल्ली के खाद्य आपूर्ति मंत्री इमरान हुसैन ने कहा कि यह देखा जा रहा है कि खुदरा बाजार में टमाटर-प्याज के दाम बढ़े हैं जबकि थोक बाजार में ऐसा कोई असर नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि प्याज व टमाटर का स्टॉक रोका जा रहा है जो दाम बढ़ने का कारण बन रहा है। इस स्थिति को काबू पाने के लिए सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है। जांच टीमें आजादपुर मंडी, ओखला मंडी, केशोपुर मंडी समेत अन्य मार्केट पर नजर रखेंगी। करीब दो हफ्ते सुस्ताने के बाद प्याज के दाम में फिर उछाल आया है। थोक में गुणवत्ता के अनुसार इसके भाव 3200 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच पहुंच गए हैं। वहीं फुटकर भाव दोबारा 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। प्याज के बढ़ते दाम हरदम सुर्खियों में रहे हैं। प्याज की तेजी ने पिछले वर्षो में कई सरकारों की बलि ली है। आने वाले समय में गुजरात, हिमाचल और उत्तर प्रदेश में नगर निकायों के चुनाव हैं। लिहाजा दो हफ्ते पहले जब प्याज के भाव फुटकर में 50 रुपये तक पहुंचे थे तो लोगों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। संयोग से प्याज इस भाव पर टिक नहीं पाया। पुराने प्याज के भरपूर स्टाक और नई की आवक के नाते इस पर ब्रेक लग गया लेकिन, बीते तीन दिनों की तेजी में भाव लगभग पुराने स्तर पर आ गये तो चर्चा भी शुरू हो गई। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ)के उपनिदेशक डा. रजनीश मिश्र के मुताबिक गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ राज्य प्याज के प्रमुख उत्पादक हैं। पूरी फसल का करीब 60 फीसद रबी के सीजन में और 40 फीसद खरीफ में पैदा होता है। इस बार बारिश के कारण उत्पादक राज्यों में फसल प्रभावित है। दक्षिण भारत में हाल की बारिश से खोदाई पर भी असर पड़ा है। मौजूदा तेजी की यही वजहें हैं। निदेशक, उद्यान एसपी जोशी के मुताबिक मांग और आपूर्ति में फर्क के कारण आई तेजी चंद दिनों की बात है। बाजार में विकल्प के रूप में सागा प्याज आने लगी है। इसकी आवक बढ़ने के साथ ही प्याज की मांग और दाम दोनों घटेंगे। यूं भी खरीफ के प्याज का भंडारण संभव नहीं, लिहाजा इसकी भी आपूर्ति बढ़ने के साथ भाव भी घटेंगे।
कारोबार से जुड़े जय सिंह के अनुसार नई प्याज में अभी नमी है साथ ही यह गुणवत्ता में भी खराब है। एक बोरी में पांच से सात किलोग्राम माल खराब निकल रहा है। नमी के नाते ग्राहक भी इसे कम पूछ रहे हैं। व्यापारी भी खराब गुणवत्ता के कारण संभलकर सौदा कर रहे हैं। मांग पुराने की है लिहाजा भाव टाइट है। फिलहाल अगले कुछ दिनों तक इसमें उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

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