गोमूत्र और गोबर से अब बनेंगे इत्र और स्प्रे

कन्नौज, उत्तर प्रदेश/नगर संवाददाताः सुगंध नगरी के नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश के कन्नौज में अब गोबर और गोमूत्र से भी सुगंधित उत्पाद बनाए जाएंगे। औषधीय गुणों से भरपूर गोमूत्र और गाय के गोबर की बदबू को सुगंध में तब्दील कर इससे विभिन्न उत्पाद बनाने को लेकर पहल शुरू कर दी गई है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की पहल पर सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) कन्नौज ने इस योजना परकाम शुरू किया है। कुछ दिन पहले ही संस्थान के विशेषज्ञों ने मंत्रालय के अफसरों संग इस कार्ययोजना पर चर्चा की।

मिलेगी फूलों की खुशबू : इन उत्पादों में अलग अलग फूलों की प्राकृतिक सुगंध मिलेगी। गुलाब, गेंदा, जूही, चमेली, बेला के साथ तुलसी व चंदन की महक वाले उत्पाद बनाए जाएंगे। साथ में फाइन परफ्यूमरी के तहत कई तरह के स्प्रे निर्माण पर फोकस होगा। कार व रूम फ्रेशनर के दर्जनों उत्पाद तैयार होंगे। गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखने के लिए लैब में अलग-अलग तरह से करीब दो दर्जन शोध पूरे किए जाएंगे।

दवाएं बनाने की भी योजना : गोमूत्र-गोबर के औषधीय गुणों पर आधारित दवाएं बनाए जाने की भी योजना है। तुलसी, खस, मेंथा, कस्तूरी, हींग, इलायची, कपूर समेत अन्य औषधीय पौधों की मदद से इन दवाओं को तैयार किया जाएगा।

यह होंगे फायदे : इस योजना को देश में पशुधन बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गोमूत्र और गाय के गोबर की व्यावसायिक मांग बढ़ने से गौ पालन को प्रोत्साहन मिल सकता है। यदि यह प्रयोग सफल होता है तो कृत्रिम सुगंध उत्पादों का एक बेहतर और हानिरहित विकल्प मिल सकेगा।

मंत्रालय से मिले सहयोग व व्यवस्थाओं से शोध कार्य में तेजी लाई गई है। यह केंद्र का अब तक का बड़ा कदम साबित होगा। इसके बेहतर परिणाम आएंगे।- शक्ति विनय शुक्ला, प्रधान निदेशक, एफएफडीसी, कन्नौज

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