जन सेवक बनकर जरूरतमंद लोगो की सेवा के लिए सदैव तैयार रहते गोभक्त रामलाल सोलंकी

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जालोर, राजस्थान/सदारामः किसी कवि ने बहुत ही बढ़िया बात लिखी है कि
काम करो ऐसा की पहचान बन जाए।
कदम दर कदम चलो ऐसे कि निशान बन जाए।।
दोस्तो ये जिंदगी तो सब काट लेते है मगर ।
जिंदगी जियो ऐसे की एक मिशाल बन जाए।।
इन्ही बातो पर चलकर नित्य नई उड़ान भरने वाले होठो पर मधुर मुस्कान के साथ नया कीर्तिमान रचने वाले गोभक्त और समाजसेवी श्री रामलाल जी सोलंकी जो हमेशा परहित परोपकार की भावना से कार्य करके अन्य लोगो के लिए मददगार भी बनते है। श्री रामलाल जी सोलंकी का जन्म 5 जनवरी 1987 को जालोर जिले के भीनमाल तहसील में बसे नासोली (पांच पादरा ) गांव में हुआ। पिताजी जवानारामजी तथा माताजी गुलाबी देवी के साथ संतानों में वह छठवीं संतान है। बचपन से ही आपमे अलग अलग लोगो से मिलना एक रुचि का विषय रहा है। वह बाल्यकाल से ही निडर, किसी भी विषय को खोजना और उसकी जांच पड़ताल करना, सबसे मेलजोल बनाकर आगे बढ़ना आपका एक अनूठा गुण  है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव में ही पूरी की। बचपन मे ही पिताजी की मौत होने के कारण जीवन अत्यंत संघर्ष और चुनौतियों से भरा रहा। फिर पिताजी के असामयिक मृत्यु हो जाने से रोजगार की तलाश में सन 2000 में बेंगलूर आ गए फिर दौर शुरू संघर्ष चुनौतियों और सपनों को साकार करने का सुनहरा दौर, फिर आगे बढ़ते गए कभी पीछे मुड़कर ही नही देखा। बेंगलूर में उन्होंने कठोर मेहनत की फिर जहां पर नौकरी की वही पर उन्ही के साथ भागीदारी में व्यापार की शुरुआत की। उनके सेठ राजेश रांका के सहयोग से उनकी भागीदारी में निरंतर व्यापार में प्रगति की। रामलाल सोलंकी को प्रत्येक क्षेत्र में सबसे अहम सहयोग बेंगलोर में सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक एवं पत्रकार श्री रूपेश सोलंकी का मिला, फिर उन्ही की प्रेरणा, हौसला अफजाई और मार्गदर्शन से सामाजिक, राजनैतिक एवं व्यापारिक क्षेत्र में निरंतर प्रगति के पथ पर बढ़ते चले गए। रामलाल सोलंकी भले ही बेंगलोर हो या राजस्थान में हो सभी जगह सामाजिक, राजनैतिक और परहित परोपकार के कार्यो में अपनी सेवा प्रदान करते है। एक सर्वसाधारण किसान परिवार में जन्मे सोलंकी का बचपन काफी कठिनाइयों से गुजरा। पिताजी की अचानक ही मौत हो जाने से परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। आजीविका चलाने के लिए खेती बाड़ी की और सब्जी लाकर बेचने का कार्य भी किया। मुसीबतों में भी सोलंकी ने कभी भी हार नही मानी। मेहनत लगन और ईमानदारी के बल पर स्वयं को बेंगलोर में स्थापित किया। व्यापार में सेल्समेनशिप का तगड़ा अनुभव उनकी सफलता का महत्वपूर्ण और अहम हिस्सा रहा। रेडीमेड मार्किट में लाल बिल्डिंग क्षैत्र में ग्राहकों, व्यापारियों, स्थानीय प्रशासन में अपनी पकड़ मजबूत बनाते गए। समाजसेवा को भी साथ साथ मे अपने जीवन का महत्वपूर्ण अंग बनाया। माली सैनी युवा संगठन बैंग्लोर के माध्यम से समाजसेवा के कार्य को आगे बढ़ाया। युवा संगठन ने प्रथम उपाध्यक्ष के पद से सुशोभित किया। इसी तरह व्यापार क्षेत्र में लाल बिल्डिंग रिटेल गारमेंट एसोसिएशन मामूलपेठ के अध्यक्ष बने तथा वर्तमान में भी अध्यक्ष पद पर ही बने हुए है। राजनैतिक क्षेत्र में निरंतर सक्रियता के कारण उत्तर भारतीय प्रवासी प्रकोष्ठ भाजपा गाँधीनगर विधानसभा क्षेत्र के उपाध्यक्ष बने। माली समाज के सिरमौर संत श्री लिखमीदास जी महाराज स्मारक विकास संस्थान अमरापुरा नागौर की प्राण प्रतिष्ठा में भी अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई। उन्हें संत श्री लिखमीदास जी युवा वाहिनी दक्षिण भारत के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी प्रदान की। माली समाज द्वारा आयोजित माली सैनी प्रिमियर लीग क्रिकेट प्रतियोगिता में भी आप निरंतर और सक्रिय सहयोग प्रदान करते आ रहे है। इसी तरह निरंतर जन सेवार्थ के कार्य के लिए अपने मित्रों के साथ प्रेरणा चेरिटेबल ट्रस्ट का गठन भी किया। गो माता की रक्षा के लिए गो सेवा के साथ साथ गाय को राष्ट्रीय माँ का दर्जा प्राप्त हो इसके लिए आप सभी गो भक्तो के साथ प्रयास कर रहे है। सम्पूर्ण उत्तर भारतीय प्रवासियों को एक मंच पर लाने के लिए अखिल भारतीय एकता मंच से भी आप जुड़े हुए है। श्री सोलंकी व्यापार के साथ 24 घंटे निस्वार्थ सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते है। राजनीति और समाजसेवा में निरंतर सक्रियता के कारण आगामी राजस्थान के विधान सभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी जताने का प्रयास भी कर रहे है।

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