आमतौर पर शांत रहने वाला जयपुर अचानक सुलग उठा

जयपुर, राजस्थान/प्रवीण अग्रवालः घनी मुस्लिम आबादी क्षेत्र है, आमतौर पर शांत रहने वाला जयपुर शुक्रवार की रात अचानक सुलग उठा, जयपुर में अधिकतर मुस्लिम बहुल इलाकों में अतिक्रमण पसरा रहता है। युवक दो पहिया वाहनों पर तीन सवारी बिना हेलमेट खुलेआम घूमते रहते है। सड़कों पर कुर्सी टेबल लगाकर ढाबे वाले खाना परोसते रहते हैं एवं मामूली बात पर देखते-देखते झगड़े आम बात है। शुक्रवार की रात ऐसे ही एक बाइक सवार पर पुलिस ने सख्ती की तो वह पुलिस वालों से उलझ गया और वह गाली गलौज करते हुए थाने पहुंच गया और बाहर भीड़ जमा होने लगी। कुछ ही पलों में वहां हजारों की भीड़ इकट्ठी होकर नारेबाजी करने लगी, पुलिस थाने में घुसकर पुलिस कर्मियों से मारपीट की एवं आगजनी का प्रयास किया। साथ ही लगते हुए पावर हाउस में एवं बाहर खड़े वाहनों में आग लगा दी गई। पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस छोड़ना पड़ा। भीड़ पर कुछ असर नहीं होने पर गोली चलानी पड़ी। जिसमें दो युवक मारे गए एवं भीड़ की मारपीट में कई पुलिसवाले गंभीर घायल हो गए। जिंनका इलाज चल रहा है, शुक्रवार की रात से आज तक कर्फ्यू जारी रहा। आज शाम कर्फ्यू में 3:30 से 4:30 तक 2 घंटे की ढील दी गई। इससे पूर्व मृत युवक आदिल के परिजनों एवं स्वयंभू नेता एक करोड़ रुपए मुआवजा एवं सरकारी नौकरी मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़े रहे। लंबे दौर की बातचीत के बाद आज दोपहर बाद अंतिम संस्कार हो। छोटी सी घटना से इतना बड़ा बखेड़ा होना एक नहीं अपितु अनेक सवाल छोड़ गया है। क्या पुलिस अपराधियों पर सख्ती नहीं करें एवं उन्हें मनमानी करने दे और यदि सख्ती से कार्यवाही पर उपद्रव होता है तो उपद्रवियों को शांत करने के लिए उनके तुष्टीकरण की नीति सही है। क्या इससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद नहीं होंगे एवं पुलिस का मनोबल नहीं गिरेगा इनका जवाब कौन देगा।

Share This Post

Post Comment