भगवान भरोसे बदरीनाथ पुराना पैदल मार्ग

उत्तरकाशी, उत्तराखंड/नगर संवाददाताः मानसून के दौरान जगह-जगह भूस्खलन से बदरीनाथ हाईवे बंद होना कोई नई बात नहीं है। बावजूद इसके इस बार भी शासन-प्रशासन की ओर से बदरीनाथ पुराना पैदल मार्ग की सुध नहीं ली गई। नतीजतन हाईवे बंद होने से यात्रियों को जगह-जगह रोकना पड़ रहा है। आजादी से पहले श्रद्धालु पैदल मार्ग से श्री बदरीनाथ धाम जाते थे। 1960 के दशक के बाद सड़क मार्ग से यात्रा सुचारु हुई, लेकिन पैदल मार्ग स्थानीय लोगों की आवाजाही का जरिया बने रहे। इन पैदल मार्गों से लोग गांवों में आवाजाही करते थे। लामबगड़ स्लाइड जोन में आए दिन हाईवे बंद हो रहा है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को यात्रियों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन अब यात्री भी बिना देर किए हुए लामबगड़ पुराना यात्रा पैदल मार्ग से तीन किलोमीटर दूरी तय कर लामबगड़-जेपी परियोजना स्थल तक जा रहे हैं। यात्रियों को तीन किलोमीटर की दूरी पैदल तो नापनी पड़ रही है, लेकिन बदरीनाथ की यात्रा में यह कष्ट उन्हें खल नहीं रहा है। जनप्रतिनिधियों की ओर से कई बार पुराना बदरीनाथ पैदल मार्ग की मरम्मत की मांग भी की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई, जबकि यह बदरीनाथ ट्रै¨कग यात्रा रूट के रूप में भी उपयोग हो सकता है। वर्ष 2013 की आपदा में बदरीनाथ व हेमकुंड मार्ग पर फंसे यात्रियों को जोशीमठ तक सुरक्षित इसी पैदल मार्ग से निकाला गया था। तब इस पैदल मार्ग की उपयोगिता देश-दुनिया के सामने सिद्ध हुई थी। लेकिन आपदा के बाद हाईवे सुचारु हुआ तो पैदल मार्ग को फिर से भुला दिया गया। पहले गांवों में पैदल आवाजाही होने के चलते बदरीनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर ग्रामीणों की आवाजाही रहती थी। लिहाजा इस पैदल मार्ग की मरम्मत भी होती थी। लेकिन राज्य निर्माण के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधा मुहैया होने के बाद इस पैदल मार्ग की उपयोगिता ग्रामीणों के लिए नहीं है। ऐसे में इसे ट्रै¨कग रूट के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। आपदा के समय यह मार्ग वरदान साबित हुआ था।

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