सेना में अफसरों का ‘दाना-पानी’ बंद, नहीं मिलेगा राशन

लखनऊ, उत्तर प्रदेश/नगर संवाददाताः सेना में तैनात अफसरों का अब अपने ही विभाग से दाना पानी उठ गया है। अब शांत क्षेत्रों (पीस एरिया) में तैनात सैन्य अफसरों को सेना की आपूर्ति कोर से मिलने वाला राशन नहीं मिलेगा। उनको राशन के साथ अन्य खाद्य उत्पाद खरीदने के लिए प्रतिदिन 96 रुपये भत्ता दिया जाएगा। यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू कर दी गई है। सेना केवल अग्रिम हिस्सों में तैनात अफसरों को ही आपूर्ति कोर से राशन देगी। इसके अलावा सेना अगले चरण में जवानों और जूनियर कमीशंड अधिकारियों को राशन आपूर्ति भी बंद करने जा रही है। लखनऊ में एक जुलाई से अफसरों को राशन नहीं मिल रहा है। ऐसे में यहां अकेले रहने वाले अफसरों के आगे खड़ी हो गई है। यह अफसर अपना राशन मेस को मुहैया कराते हैं जहां उनका खाना बनता है। साथ ही वह यूनिटों में राशन देते हैं जहां उनके लिए सामूहिक रूप से भोजन का इंतजाम किया जाता है। सेना की आपूर्ति कोर का अहम काम जवानों को गुणवत्ता वाला खाद्य पदार्थ मुहैया कराना है। इस कोर का काम रक्षा मंत्रलय लगातार कम कर रहा है। माना जा रहा है कि सेना में भी जवानों की कमी की जाएगी। जिसके लिए सेना की आपूर्ति कोर, मिलिट्री फार्म सहित कई यूनिटों के काम को खत्म किया जा रहा है। इसी कड़ी में पिछले साल आपूर्ति कोर के स्लाटर हाउस को बंद कर दिया गया। जहां जवानों और अफसरों को मीट की आपूर्ति के लिए पशुओं की कटान होती थी। अब रक्षा मंत्रलय ने एक और फरमान जारी कर दिया है। यह भी होता था राशन में: अफसरों को मीट न खाने पर प्रतिदिन दो अंडे और 750 मिलीलीटर दूध दिया जाता था, जबकि एक दूसरी श्रेणी में अफसरों को रोजाना छह अंडे और एक लीटर दूध प्रतिदिन आपूर्ति कोर मुहैया कराती थी। इसके अलावा अफसरों को चाय, काफी, जैम, दलिया, चीज, मसाले सहित कई वस्तुएं भी मिलती थी। होगा दोहरा नुकसान: भूतपूर्व सैनिक संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मेजर आशीष चतुर्वेदी (रिटायर्ड) बताते हैं कि इस नई व्यवस्था से सैन्य अफसरों को दोहरा नुकसान होगा। एक तो प्रतिदिन 96 रुपये मिलने वाला भत्ता उनकी आय में जुड़ जाएगा। जिस पर उनको आयकर देना होगा। दूसरा वह बाहर से जो सामान खरीदेंगे उस पर जीएसटी देना होगा। सेना में पहले से 14 हजार से अधिक अफसरों की कमी है।

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