लू से जूझ रहे दिल्लीवासियों को मानसून की बौछारों के लिए करना होगा इंतजार

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः फिलहाल भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे दिल्लीवासियों को मानसून की बौछारों के लिए अभी थोड़ा इंतजार और करना पड़ेगा। गति अच्छी होने के बावजूद दिल्ली के रूट पर मानसून एक्सप्रेस अब कुछ लेट चल रही है। पहले जहां उम्मीद थी कि यह दिल्ली में जून के अंतिम सप्ताह तक पहुंच जाएगी, वहीं अब चार या पांच जुलाई के आसपास आने की संभावना है। केरल में मानसून पहुंचने की सामान्य तिथि 1 जून है। इस साल यह वहां 29 मई को ही पहुंच गया। चूंकि केरल से दिल्ली तक मानसून के पहुंचने में चार सप्ताह लगते हैं, अत: उम्मीद बनी थी कि दिल्ली में भी यह सामान्य तारीख यानि 29 जून या उससे भी पहले आ सकता है। लेकिन तटीय क्षेत्रों से आगे बढ़ कर मानसून की चाल थोड़ी धीमी पड़ गई है। इसी वजह से यह मुंबई में दो दिन जबकि कोलकाता में चार दिन लेट पहुंचा। अभी मानसून महाराष्ट्र को कवर कर चुका है और गुजरात में वल्साद पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल और बंगाल की खाड़ी होते हुए उत्तर भारत की ओर यह 20 या 21 जून को झारखंड एवं बिहार पहुंचेगा। यहां से मानसून चरणबद्ध रूप में पूर्वी उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश की ओर बढ़ेगा। इसके बाद हिमाचल होते हुए पंजाब, हरियाणा एवं राजधानी में दस्तक देगा। झारखंड और बिहार में मानसून आने के बाद दिल्ली तक पहुंचने में लगभग 15 दिन का समय लग जाता है। इस हिसाब से दिल्ली में मानसून 4 या 5 जुलाई के आसपास ही पहुंचने की उम्मीद है। प्री मानसून की बारिश 25 जून के लगभग शुरू हो सकती है। मानसून को गति देने के लिए कम दबाव का क्षेत्र बनना जरूरी होता है। इसी से मानसून आगे बढ़ता है, लेकिन तटीय क्षेत्रों में स्थिति अनुकूल नहीं रही। इसी तरह अगर अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र ओमान की बजाय भारत की ओर बनता है तो दिल्ली तक मानसून बढऩे में मदद मिलती है। 2016 में मानसून दिल्ली में 2 जुलाई को पहुंचा था। बारिश 97 फीसद यानी सामान्य रही थी, जबकि 2015 और 2014 में बारिश क्रमश: 86 और 88 फीसद यानी सामान्य से कम रही थी। इस साल दिल्ली में 1 से 11 जून के मध्य -42 फीसद कम बारिश हुई है। यह 7.7 फीसद होनी चाहिए थी, लेकिन महज 4.4 फीसद हुई है। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. केजे रमेश ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को मुंबई में झमाझम बरसने के बाद मानसून के आगे बढऩे की गति में थोड़ा ठहराव आ गया है। हालांकि ओडिशा, झारखंड और आसपास के इलाकों में बादलों की उमड़-घुमड़ जारी है। अगर मानसूनी बादल यहां झमाझम करते हैं तो फिर आगे की गति ठीक हो जाएगी। कम दबाव वाला क्षेत्र शिफ्ट होने की संभावना भी लगातार बनी हुई है। हालांकि अधिक स्पष्टता सेंट्रल और वेस्टर्न राज्यों के पूर्णतया कवर होने के बाद ही बन पाएगी।

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