बाल मजदूरी में अभिभावकों का भी इतिहास खंगालेगा आयोग

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः बाल आयोग ने मजदूरी के दलदल से बाहर निकाले गए बच्चों के अभिभावकों के इतिहास को खंगालने की तैयारी शुरू कर दी है। उसने कानूनी सलाहकारों और जुवेनाइल एक्ट के विशेषज्ञों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। इसको लेकर जल्द ही एक प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाया जाएगा। बच्चों की खरीद-फरोख्त कर भी उन्हें मजदूरी में धकेला जाता है, जिसमें दुर्भाग्य से परिजन भी शामिल होते हैं। इस पहलू पर भी आयोग ने विचार करना शुरू कर दिया है। आयोग के सदस्य यशवंत जैन ने कहा कि यह सामाजिक बुराई है। कई बार एक ही परिवार के बच्चों को रेस्क्यू टीम ने इस दलदल से निकाला है। ऐसे परिवारों के बारे में जानकारी रखना जरूरी है। बाल मजूदर की सूचना मिलने पर चाइल्ड लाइन, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी, बाल आयोग की टीम पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्रवाई करती है। रेस्क्यू के बाद चाइल्ड लाइन, कमेटी और बाल आयोग अभिभावकों की पड़ताल करेगा। पीड़ित बच्चे को चाइल्ड लाइन समेत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया जाता है। यहां उसके साथ हुए पूरे घटनाक्रम को दर्ज किया जाता है। आयोग के अनुसार ऐसी शिकायतें मिली हैं कि परिवार ही विभिन्न कारणों से अपने बच्चों से मजदूरी कराता है। छापेमारी होने पर बच्चों ने बताया कि उन्हें इस दलदल में परिजनों ने ही धकेला है। ऐसे में लगातार एक ही परिवार के सामने आने से उनपर कार्रवाई हो सकेगी।

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