उत्‍तराखंड में चिकित्सा सेवाओं के लिए पंजीकरण दरों में होगी वृद्धि

देहरादून, उत्तराखंड/नगर संवाददाताः प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं के सवाल पर सरकार सदन में विपक्ष के साथ ही अपने विधायकों से घिरी नजर आई। सरकार ने स्वीकारा कि प्रदेश में लोक निजी सहभागिता (पीपीपी) के तहत चलने वाले चिकित्सालयों की स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। सरकार ने इन चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी की बात को स्वीकारते हुए इनके साथ हुए करार पर पुनर्विचार करने की बात कही है। सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना और कर्मचारी बीमा योजना के दायरे में न आने वाले लोगों के पंजीकरण शुल्क को बढ़ाने की बात कही है। सरकार का मानना है कि प्रदेश में नई तबादला नीति आने के बाद पर्वतीय क्षेत्रों से चिकित्सकों की कमी की समस्या को दूर किया जा सकेगा। सोमवार को विशेष सत्र के पहले दिन पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विपक्ष के विधायक प्रीतम सिंह पंवार के सवाल पर संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि केंद्र ने स्वास्थ्य योजनाओं के लिए अहम नीति बनाई है। इस पर जल्द निर्णय होगा। प्रदेश में भी इस दिशा में अहम कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना व यू हेल्थ कार्ड के तहत कैशलैस सुविधा दी जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी प्रदेश में चिकित्सा अधिकारियों के 67 फीसद, चिकित्सा अधिकारी ग्रेड वन के 81 फीसद और वरिष्ठ चिकित्सकों के 41 फीसद पद रिक्त चल रहे हैं। साधारण चिकित्सकों व डेंटल चिकित्सकों के पदों को भरने की कवायद की जा रही है। प्रदेश में पीपीपी मोड पर पांच चिकित्सालय संचालित हो रहे हैं लेकिन यहां भी चिकित्सकों की कमी है। इसके लिए उनसे हुए करार पर विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों की कमी है, इसके लिए सरकार सभी मेडिकल कालेजों में सीटों की बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। विधायक मुन्ना सिंह चौहान के सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए बीडीएस चिकित्सकों की तैनाती भी कर सकती है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उचित कदम उठाने की बात कही।

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