झारखंड से लोगों को ऑनलाइन चूना लगाने वाले 4 शातिर चढ़े छत्तीसगढ़ पुलिस के हत्थे

रायपुर, छत्तीसगढ़/मयूर जैनः कभी बैंक मैनेजर बनकर, तो कभी आधार कार्ड से बैंक खाता लिंक करने का झांसा देकर एटीएम फ्रॉड करने वालों के गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। रायपुर पुलिस ने गिरोह के 4 सदस्यों को झारखंड के जामताड़ा से गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से दो आरोपी दूसरे मामले में जेल में बंद है। आरोपी आम लोगों के बैंक खातों की जानकारी लेने के लिए आधार स्टेटस एप का इस्तेमाल करते थे। इससे बैंक के खाता धारकों की जानकारी मिल जाती थी। एएसपी दीपमाला कश्यप ने बताया कि पिछले दिनों एटीएम फ्रॉड के पीडि़तों के मोबाइल पर आने वाले नंबरों की जांच की गई। ये नंबर झारखंड के देवघर और जामताड़ा के निकले। इसके बाद पुलिस की एक टीम ने जामताड़ा में संदिग्ध मोबाइल नंबरों के आधार पर ग्राम घोरमारा जिला देवघर के गौरव कुमार, सुमन कुमार, ग्राम झांझर दुमका निवासी मनीष कुमार मंडल और ग्राम बड़ा डूमरिया निवासी मोहम्मद असगर अंसारी की पहचान कर ली। इसके बाद आरोपियों के अड्डे पर छापा मारा गया। इनमें से गौरव कुमार और सुमन कुमार को पकड़ लिया गया। मनीष कुमार और मोहम्मद असगर जेल में हैं। गिरोह का एक सदस्य एटीएम ब्लॉक होने, आधार कार्ड से लिंक, एटीएम की वैलिडिटी बढ़ाने आदि के बहाने लोगों को फोन करते थे। इसके बाद बैंक खाता नंबर, एटीएम कार्ड नंबर, पिन नंबर, ओटीपी नंबर पूछ लेते थे। यह जानकारी दूसरे सदस्य को देते थे। दूसरा सदस्य एटीएम की गोपनीय जानकारी की मदद से मोबाइल मनी ट्रांसफर-रिचार्ज सॉफ्टवेयर जैसे पेटीएम, आइडिया मनी, एयरटेल मनी, एमपेसा आदि एप्लीकेशन के माध्यम से ऑनलाइन शॉपिंग करते थे और भुगतान पीडि़त के बैंक खाते से होता था। आरोपी आधार स्टेटस एप का इस्तेमाल करते हैं। इसके माध्यम से आधार नंबर वाले किसी भी व्यक्ति के बैंक खाते का पता कर लेते हैं। इसके बाद उस बैंक का मैनेजर या कर्मचारी बनकर फोन करते हैं। आरोपियों के पास बिहार के नवादा जिले के एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, कॉर्पोरेशन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, मध्य बिहार ग्रामीण बैंक, केनरा बैंक सहित कई बैंकों के ग्राहकों और उससे संबंधित जानकारी मिली हैं। आरोपियों के पास एसबीआई कियोस्क सेंटर का आईडी मिला है। आरोपी कियोस्क सेंटर से जुड़े हैं और बैंक ग्राहकों की पूरी जानकारी कियोस्क सेंटर से ही निकालते हैं। उल्लेखनीय है कि बैंकिंग के अनेक काम कियोस्क सेंटरों में होता है। इसलिए ग्राहकों से संबंधित जानकारी वहां भी रहती है। आरोपियों के पास 12 मोबाइल भी मिले हैं। इनमें इस्तेमाल हुए सिम फर्जी दस्तावेजों के जरिए लिए गए हैं। फर्जी आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज दिखाकर ही सिम लिए गए हैं।

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